बाढ़ राहत घोटाले का मामला आइने की तरह साफ होने के बाद भी एसडीएम ने अब तक दोषी लेखपालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की बात कहकर वह मामले से पल्ला झाड़ रहे है। उधर बैंक में फर्जी खाता खोलने के मामले में भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
बाढ़ राहत के बियरर और एकाउंटपेयी चेक लेखपाल ने दलालों के हाथ बेच दिए और दलालों के माध्यम से फर्जी आईडी के जरिए फर्जी खाते खोलकर उनसे पैसा निकाला गया। जांच में यह बात स्पष्ट हो चुकी है। इस मामले में एसडीएम पीके सिंह के निर्देश पर भारतीय स्टेट बैंक ने दो दलालों के खिलाफ एफआईआर तो दर्ज करा दी लेकिन इस पूरे घोटाले के सूत्रधार लेखपालों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
बाढ़ पीड़ितों ने एसडीएम पर लेखपालों को बचाने और निष्पक्ष जांच न करने का आरोप लगाया है। उधर भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक ने भी अपना दामन बचाने के लिए खाता शिनाख्त करने वाले दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी, लेकिन खाता शिनाख्त करने वाले जितेंद्र का एकाउंट नंबर और हस्ताक्षर न मिलने पर एसओ को उसका नाम हटाने के लिए पत्र लिखना पड़ा। खाता खोलने में लापरवाही के लिए शाखा प्रबंधक और संबंधित बैंक कर्मियों को जांच के दायरे में नहीं रखा गया है। इससे जांच की निष्पक्षता पर उंगलियां उठ रहीं हैं।
इन बिंदुओं पर नहीं हुई जांच
-दलालों तक कैसे पहुंचे बियरर और एकांउटपेयी चेक
-किसने बनाए फर्जी फोटो मतदाता पहचानपत्र
-फर्जी खाते खोलने के दौरान फर्जी आईडी और शिनाख्त करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर और एकाउंट नंबर का मिलान करने में किसने बरती लापरवाही
-लेखपालों ने दूसरों के चेक क्यों दिए दलालों को
-पूरे घोटाले में लेखपालों के साथ दूसरे राजस्व कर्मियों की क्या रही भूमिका। क्यों नहीं हुआ सत्यापन
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बाढ़ राहत घोटाले की जांच अभी जारी है। इस मामले में फर्जी खातों की शिनाख्त करने वाले दलालों के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक ने रिपोर्ट दर्ज करा दी है। दोषी लेखपालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
-पीके सिंह, एसडीएम, निघासन