गोला के निर्माणाधीन कॉरिडोर में ध्वस्त किए गए प्राचीन मंदिरों का मलबा हटाती पोकलेन मशीन। संवाद
गोला गोकर्णनाथ। नगर में निर्माणाधीन शिव मंदिर कॉरिडोर के तहत जहां भव्य निर्माण कार्य चल रहा है, वहीं इस प्रक्रिया में एक सदी से अधिक पुराने मंदिरों, धर्मशालाओं, कैमी और वट वृक्ष का अस्तित्व समाप्त हो गया है।
कॉरिडोर के पहले और दूसरे चरण का कार्य अंतिम दौर में है। 108 स्तंभों पर बन रहे परिक्रमा पथ में पौराणिक शिव मंदिर के पीछे स्थित अन्य मंदिरों की पुनर्स्थापना प्रस्तावित है, जिसके लिए नए मंदिर बनाए जा रहे हैं।
शुक्रवार रात पौराणिक शिव मंदिर के पीछे स्थित प्राचीन राधाकृष्ण मंदिर, मां काली मंदिर, करीब 300 वर्ष पुराने बताए जा रहे हनुमान मंदिर, काल भैरव मंदिर के अवशेष तथा बीच स्थित वट वृक्ष को ध्वस्त किया गया।
शनिवार को कॉरिडोर आर्किटेक्ट उत्कर्ष शुक्ला, जेई विवेक वाजपेई ने विधायक अमन गिरि के साथ ध्वस्तीकरण और निर्माण कार्य का निरीक्षण किया।
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सुहागिनों को वट सावित्री पूजा के लिए अन्यत्र जाना होगा
शिव मंदिर परिसर का प्राचीन वट वृक्ष कॉरिडोर के परिक्रमा पथ में आ रहा था, उसे हटा दिया गया है। अब वट सावित्री पूजा के लिए सुहागिनों को अन्य स्थानों पर जाना पड़ेगा।