43 गवाह, 27 पन्ने में आरोप पत्र....217 पेज की केस डायरी
निघासन कांड मामले में पुलिस ने जुनैद, सुहेल, हाफिजुर्रहमान, आरिफ, करीमुद्दीन और सुनील गौतम के खिलाफ 27 पन्ने का आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया है, जिसमें 43 गवाहों के आधार पर निघासन पुलिस ने आरोपियों को दंडित कराने की बात कही है। पुलिस ने अदालत में पेश किए गए आरोपपत्र में आम जनता के 12 व्यक्तियों को गवाह के रूप में शामिल किया है। तीन चिकित्सकों सहित 28 पुलिसकर्मियों को गवाह बनाया है।
इन 12 गवाहों पर टिका है अभियोजन
पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल करते हुए बताया कि घटना को साबित करने के लिए वादिनी समेत 12 लोग जनता के वे गवाह हैं, जो घटना को साबित करने के लिए काफी हैं। पुलिस की विवेचना के दौरान भी इन व्यक्तियों ने घटना को साबित करने वाले बयान दिए हैं, जिसमें वे आंखों देखी घटना के गवाह हैं। इन्होंने आरोपियों को दो बहनों का अपहरण कर ले जाते हुए अपनी आंखों से देखा है।
एक आरोपी के अधिवक्ता पेश हुए
निघासन कांड मामले में पहली बार किसी आरोपी की ओर से अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुए। सबूत मिटाने और दलित उत्पीड़न के आरोपी करीमुद्दीन की ओर से अधिवक्ता वकार अहमद ने अपना वकालतनामा पेश किया। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके आरोपी को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया जा रहा है।
अभियोजन से भी पेश हुए वकील
अभियोजन की ओर से वादिनी मुकदमा ने व्यक्तिगत अधिवक्ता के रूप में अखिलेश दीक्षित को विशेष लोक अभियोजक के साथ अभियोजन पक्ष के समर्थन के लिए नियुक्त किया है। शुक्रवार को वादिनी स्वयं अदालत में पेश हुई और अदालत को वकील मुकर्रर करने की जानकारी दी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चार चोटें पाई गईं
लखीमपुर खीरी। अदालत में आरोपपत्र के साथ मृतक बहनों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी दाखिल की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सकों की टीम ने मृतक किशोरियों के शरीर पर मृत्यु पूर्व चार चोट आने का उल्लेख किया है। साथ ही अपनी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह उल्लेख किया है कि गला घोट कर हत्या की गई है।
दोनों बहनों के शव को पोस्टमार्टम के लिए जब लाया गया तो पुलिस को हाथों में पहने जाने वाली कांच की चूड़ियों के टूटे हुए टुकड़े भी मिल गए थे। जांच पड़ताल करते हुए पुलिस ने चूड़ियों के टुकड़ों को भी फर्द बरामदगी करते हुए मुकदमे में बतौर सबूत पेश करने की रणनीति अपनाई है। कानूनी जानकार बताते हैं कि अगर अभियोजन की कहानी मौखिक गवाहों से सटीक बैठती है तो वही चूड़ियों के टुकड़े आरोपियों के गले का फंदा बन सकती हैं।