लखीमपुर खीरी। मेडिकल कॉलेज के शैक्षिक सत्र में फैकल्टी (संकाय) की कमी बाधा बन गई। कॉलेज का शहर में बन रहा भवन भी निर्माणाधीन है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन को इस सत्र से कॉलेज में पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद थी। संसाधनों को भी दुरुस्त किया जा रहा था। एनएमसी टीम के निरीक्षण के बाद कॉलेज में शैक्षिक सत्र संचालन की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर देवकली में मेडिकल कॉलेज का भवन निर्माणाधीन है। यहां अधिकांश काम पूरा हो चुका है। मेडिकल कॉलेज के अस्पताल का भवन शहर में बन रहा है। साथ ही जिला अस्पताल एमसीएच विंग-ओयल भी मेडिकल कॉलेज के अधीन है। शहर में बन रहे भवन को पूरा होने में अभी कई महीने का समय लगेगा।
उम्मीद थी कि इस सत्र से मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू हो जाएगी। कॉलेज प्रशासन ने इसकी तैयारियों को भी पूरा कर लिया था। महानिदेशक, चिकित्सा एवं शिक्षा के निरीक्षण के बाद एनएमसी टीम ने मेडिकल कॉलेज के भवन और अन्य व्यवस्थाओं की पड़ताल की। जांच के बाद सत्र संचालन की उम्मीद और बढ़ गई थी। मगर एनएमसी ने मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू करने की मान्यता नहीं दी है। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटों पर प्रवेश होने हैं।
86 फैकल्टी की जरूरत, मेडिकल कॉलेज में आधे भी नहीं
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर्य देश दीपक ने बताया कि नियमानुसार कॉलेज में 86 फैकल्टी होनी चाहिए। बताते हैं कि मौजूदा समय में सभी को मिलाकर 25 से 27 तक हैं। यही वजह रही कि मेडिकल कॉलेज को शैक्षिक सत्र संचालन की अनुमति नहीं मिल सकी है। जांच के समय भी एनएमसी टीम ने इन बिंदु को अहम माना था। कॉलेज से जिला अस्पताल ओयल की दूरी पर भी सवाल किए थे। बताया जाता है कि कॉलेज से अस्पताल की इतनी ही दूरी हो, जो आधे घंटे में तय की जा सके।
फैकल्टी की कमी के चलते मान्यता नहीं मिल सकी है। भवन और संसाधन की सभी व्यवस्थाएं पूरी हो गई हैं। शैक्षिक सत्र संचालन के संबंध में अपील की तैयारी की जा रही है। - डॉ. आर्य देश दीपक, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज