शासन की दोहरे रवैये से गन्ना किसान हो रहे बेदम
किसानों से ब्याज और कर्ज वसूली के लिए जारी हुए कड़े पत्र
चीनी मिलों ने ना तो पूरा गन्ना मूल्य दिया ना ही देरी पर ब्याज
गन्ना एक्ट का मखौल उड़ा रही चीनी मिलें और शासन है चुप
आर्थिक संकट के चलते आधा दर्जन किसान कर चुके हैं आत्महत्या
इंफो
देय ब्याज
2012-13 66.65 करोड़
2013-14 79.50 करोड़
2014-15 38.28 करोड़
किसानों के लिए बेहतर काम का दावा करने वाली सरकार किसानों के साथ दोहरा रवैया अपना रही है। एक तरफ रोक के बावजूद बैंक अपने कर्जों की वसूली के लिए आरसी जारी करने की चेतावनी वाला कड़ा पत्र जारी कर रही है वहीं दूसरी ओर सरकार ने गन्ना भुगतान में देरी पर किसानों को अदा किए जाने वाले ब्याज का भुगतान न करने की चीनी मिलों को छूट दे रखी है। किसानों को अपनी मेहनत की कमाई का गन्ना मूल्य तो मिला नहीं, उन्हें गन्ना एक्ट के तहत मिलने वाला ब्याज भी नहीं मिल रहा है। चीनी मिल पर मेहरबानी और किसानों पर कोड़े जैसे पड़ने वाले चेतावनी पत्र के दोहरे मानदंड को लेकर किसानों में गुस्सा है।
पेराई सत्र 2012-13 और 2013-14 अवधि में नौ चीनी मिलों पर किसानों का 1,46,15,63000 रुपये (146.15 करोड़) ब्याज बना था जिसे अदा न करने की सरकार ने मिलों को छूट दे दी थी। 2014-15 में चीनी मिलों पर 38.28 करोड़ ब्याज की देनदारी बन चुकी है। इसके भुगतान पर अभी फैसला नहीं हुआ है। गन्ना एक्ट के प्रावधान के तहत किसानों से खरीदे गए गन्ने के मूल्य का भुगतान चीनी मिलों को 14 दिन में करना अनिवार्य है। इस अवधि के बाद बकाया गन्ना मूल्य पर किसानों को ब्याज देना अनिवार्य है। चीनी मिल मालिक किसानों की राहत के लिए बनाए गए गन्ना एक्ट की धज्जियां उड़ा रहे हैं और सरकार एक्ट को भुलाकर चीनी मिल मालिकों का साथ दे रही है।
नोटिस के साथ आरसी जारी करने का फरमान
लखीमपुर खीरी। जिले में 225 बैंकों ने करीब छह लाख किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण दे रखा है। रकम की जल्द अदायगी के लिए बैंक प्रबंधक किसानों को नोटिस देकर मानसिक तौर पर परेशान करने के लिए अधिक ब्याज लगाने का फरमान सुना रहे हैं, जिसमें 30 दिन के बाद वसूली प्रमाण पत्र यानी आरसी जारी करने की चेतावनी दी जा रही है। साथ ही ब्याज सहित कुल बकाया पर 10 फीसदी सरचार्ज वसूलने की बात कही जा रही है। वह भी तब जब शासन ने किसानों से वसूली के लिए 30 जून तक रोक लगा रखी है। यह हाल तब है पिछले एक 15 महीनों में आधा दर्जन किसानों ने आर्थिक संकट से जूझते हुए आत्महत्या कर ली थी।
मिलों पर बकाया ब्याज (लाख में)
मिल 2012-13 2013-14 2014-15
गोला 1378.4 1832.14 1040.73
पलिया 924.03 1336.27 935.65
खंभारखेड़ा 938.07 1281.56 842.07
ऐरा 751.94 685.67 334.07
अजबापुर 911.78 872.80 00
कुंभी 646.79 636.53 99.73
गुलरिया 557.57 478.98 71.63
बेलरायां 159.32 371.32 246.60
संपूर्र्णानगर 397.45 455.02 257.75
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480 करोड़ का गन्ना भुगतान भी बाकी
लखीमपुर खीरी। नौ चीनी मिलों पर किसानों का 480 करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य बकाया है। गोला मिल पर 107.46 करोड़ पलिया पर 89.62 करोड़, खंभारखेड़ा पर 64.77 करोड़, ऐरा पर 47.75 करोड़, अजबापुर पर 51.50 करोड़, कुंभी पर 15.96 करोड़, गुलरिया पर 15.70 करोड़, बेलरायां पर 47.73 करोड़, संपूर्णानगर पर 46.24 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है।
करीब पांच हजार किसानों को बैंकों ने वसूली के लिए कड़ा पत्र जारी किया है। आरसी जारी करने की चेतावनी की जानकारी नहीं हैै।
- एके द्विवेदी, एलडीएम
वर्ष 2015 में अतिवृष्टि-ओलावृष्टि के बाद से किसानों को आरसी जारी करने पर रोक लगाई गई है। बैंकें वसूली के लिए नोटिस देती हैैं लेकिन आरसी जारी करने की चेतावनी दिए जाने का मामला संज्ञान में नहीं है।
- एसपी सिंह, एडीएम
गन्ना एक्ट के मुताबिक तय समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान न किए जाने पर चीनी मिलें किसानों को बकाये पर ब्याज देंगी। चीनी मिलों पर आरोपित ब्याज की गणना कर सूचना आयुक्त कार्यालय को प्रतिदिन भेजी जाती हैै। वहीं से पर फैसला होने के बाद ब्याज भुगतान को लेकर कोई कार्रवाई की जा सकेगी।
- जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी