बांकेगंज। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के गोला और मोहम्मदी रेंज जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों में विचरण कर रहे बाघों को चित्रकूट जिले के रानीपुर टाइगर रिजर्व में नया आशियाना मिल सकता है। इसके लिए उच्चस्तरीय मंथन शुरू हो गया है। यदि ऐसा हुआ तो एक तरफ खीरी जिले में मानव-बाघ संघर्ष में कमी आएगी तो बुंदेलखंड में तराई के बाघ दहाड़ते नजर आएंगे।
चित्रकूट जिले में रानीपुर टाइगर रिजर्व की स्थापना 19 अक्टूबर 2022 में हुई है। यह प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व है। वन विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार मध्य प्रदेश की सीमा से सटे चित्रकूट जिले में नवस्थापित रानीपुर टाइगर रिजर्व में तेंदुओं की संख्या काफी है, जबकि बाघों की संख्या नाममात्र को है। यहां से करीब 180 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से बाघ रानीपुर टाइगर रिजर्व को आते-जाते हैं। इसी को देखते हुए रानीपुर टाइगर रिजर्व की स्थापना की गई है।
वन विभाग के अधिकारी तराई के बाघों को रानीपुर टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने पर विचार कर रहे हैं। दक्षिण खीरी वन प्रभाग की गोला और मोहम्मदी रेंज में वन क्षेत्र की अपेक्षा बाघों की संख्या अधिक है। इसके चलते कई बाघ जंगल से निकल कर गन्ने के खेतों में रह रहे हैं, जो मानव-बाघ संघर्ष का कारण भी बनते हैं।
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मोहम्मदी और गोला रेंज के छोटे से जंगल में बाघों की बढ़ती आबादी के कारण उन्हें गन्ने के खेतों में अपना आशियाना बनाना पड़ रहा है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में बाघ जंगल के बजाए गन्ने के खेतों में रह रहे हैं। ऐसे में उनका इंसानों से टकराव होना स्वाभाविक है। पिछले तीन माह के अंदर ही गोला और मोहम्मदी रेंज में सात लोग बाघ और तेंदुओं का शिकार हो चुके हैं। ऐसे में जंगल से सटे खेतों में जाने से भी लोग डर रहे हैं। उन्हें अपनी और अपने मवेशियों की सुरक्षा करना मुश्किल हो रहा है। यदि ये बाघ चित्रकूट भेज दिए जाते हैं तो मानव-बाघ संघर्ष की त्रासदी से निजात मिल सकेगी।
‘खीरी और पीलीभीत टाइगर रिजर्व के कुछ बाघों को चित्रकूट के रानीपुर टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने पर विचार चल रहा है। लेकिन इससे पहले वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। ताकि उनकी पारिस्थितिकी, प्राकृतवास और भोजन, पानी की आवश्यकताओं की पूर्ति का आंकलन किया जा सके।’
- सुनील चौधरी, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ( प्रोजेक्ट टाइगर )
‘संभव है कि इस संबध में उच्चस्तरीय विचार चल रहा हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर अभी कोई गतिविधि शुरू नहीं हुई है, न ही किसी प्रकार का कोई आदेश आया है।’ - संजय बिस्वाल, डीफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग
जंगल के वॉटरहोल में बैठा बाघ।- फोटो : LAKHIMPUR