लखीमपुर खीरी। पिछले पांच दिनों से हो रही बारिश के चलते जिलेभर में आम जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। पारा लुढ़क कर एकाएक नीचे आ गया है। उधर, रविवार शाम से शुरू हुई बारिश रातभर जारी रही। रात में कई बार मूसलाधार बारिश भी हुई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ही नहीं शहरी क्षेत्रों में जलभराव हो गया।
बस स्टेशनों और रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा दिखा। लगातार बारिश से तापमान गिरकर अधिकतम 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। रविवार रात ठंडी रही, दिन में भी गर्मी से राहत रही। सोमवार सुबह से बरसात होने के कारण स्कूल कॉलेजों में छुट्टी कर दी गई। जो बच्चे स्कूल गए भी, उन्हें भीगते हुए वापस होना पड़ा। सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा नजर आया। बरसात होने के कारण बाहर जाने वाले यात्रियों ने अपनी यात्रा स्थगित कर दी। बसों में नाममात्र सवारियां दिखीं।
झमाझम बारिश से शहर के कई हिस्सों में जलभराव हो गया। नालियां उफना उठीं। पानी सड़कों पर फैल गया। सावन सूखा निकलने के बाद भादों के महीने में हुई भारी बारिश ने किसानों को राहत दी है, लेकिन तेज हवाओं के कारण धान, गन्ने और केले की फसल खेतों में ही गिर गई। उन्हें इस बार धान गन्ने और केले के उत्पादन में कमी आने की आशंका सता रही है।
पिछले चार दिनों में रिकॉर्ड की गई बारिश
दिन...................रिकार्ड की गई बारिश
08 सितंबर.............14 मिमी
09 सितंबर.............22 मिमी
10 सितंबर.............28 मिमी
11 सितंबर.............87 मिमी
अगले तीन दिनों तक बारिश के आसार
मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ ने अगले तीन दिनों यानी बृहस्पतिवार तक लगातार बारिश होने की संभावना जताई है। इस दौरान तेज हवाएं चलने की भी आशंका जताई गई है। बताया गया कि मौसम में 95 फीसदी से 98 फीसदी तक नमी बनी रहेगी। तापमान में गिरावट होगी। बादलों की गर्जना के साथ बिजली गिरने की भी आशंका है। मौसम विभाग ने लखीमपुर में बारिश के लिए अलर्ट जारी किया है और लोगों को सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
तेज हवा से गिर गई धान-गन्ने और केले की फसल
तेज हवा के साथ बारिश होने से धान, गन्ने और केले की फसल को भारी क्षति पहुंची है। यह फसलें खेतों में गिर गई हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुहैल का कहना है कि धान की फसल गिरने से बालियां मरने, फसल में कीटों का प्रकोप होने की आशंका बढ़ गई है। इसका सीधा असर धान के उत्पादन पर पड़ना तय है। कीटों का प्रकोप भी बढ़ेगा। किसान यदि अभी गिरे हुए गन्ने को खड़ा कर बांध दे, तो नुकसान से बचा जा सकता है।
बरसात में गिरी धान की फसल