विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में हो रहे पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में सरगर्मियां तेज हो गई हैं। खासकर अपने-अपने खेमे से सदस्य पद के प्रत्याशियों को जिताने के लिए राजनीतिक दलों के नेताओं ने गांवों में कैडर वोटों के साधने के साथ-साथ हर तरह की जोर आजमाइश शुरू कर दी है। हालांकि प्रमुख दलों ने प्रत्याशियों को सिंबल न देकर समर्थन करने का ही मन बनाया है। पार्टियां सदस्यों के चुनाव के बाद ही अध्यक्ष पद के प्रत्याशी की घोषणा करेंगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित होने के बाद राजनीतिक दलों की नजर लालबत्ती पर है। खासकर अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने के लिए सदस्य पद के चुनाव ज्यादा अहम माना जा रहा है। राजनीतिक दल इसे ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि जितनी संख्या में जिस दल से जुड़े प्रत्याशी चुनाव जीतकर आएंगे, अध्यक्ष पद पर उसी दल की स्थिति ज्यादा मजबूत होगी। यही कारण है कि राजनीतिक दलों ने एक-एक सीट पर पार्टी समर्थित प्रत्याशियों की स्थिति और जातीय समीकरण पर नजर रखनी शुरू कर दी है। संबंधित पार्टियों के पदाधिकारियों ने समर्थित प्रत्याशी के क्षेत्र में दौरे भी शुरू कर दिए हैं। इस संबंध में राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों ने भी एक ही बयान जारी किया। सपा जिलाध्यक्ष अनुराग पटेल का कहना है कि जिला पंचायत सदस्य पद पर सिंबल नहीं दिया गया है, लेकिन जिन कार्यकर्ताओं ने पार्टी के बैनर का इस्तेमाल किया है, उन्हें रोका भी नहीं जाएगा। अध्यक्ष पद पर पार्टी ने अभी अपना रुख साफ नहीं किया है। वहीं बसपा जिलाध्यक्ष अजय चौधरी ने कहा कि अभी पार्टी की ओर से जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं आया है इसलिए अभी सिर्फ समर्थन दिया जाएगा। भाजपा जिलाध्यक्ष विनोद मिश्रा ने भी जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी का रुख साफ नहीं किया है। हालांकि सदस्य पद पर पार्टी समर्थित प्रत्याशियों को समर्थन देने की बात कही है।
सिर्फ कांग्रेस ने ही जारी की सूची
सत्तारूढ़ दल सपा के साथ-साथ बसपा और भाजपा ने भले ही पार्टी समर्थित प्रत्याशियों की सूची न जारी की हो लेकिन कांग्रेस ने जिले में पार्टी समर्थित 33 प्रत्याशियों की दो चरणों में सूची जारी कर दी है। कांग्रेस ने कहा है कि इन सभी प्रत्याशियों को संगठन कार्यकर्ता चुनाव जिताने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।