लखीमपुर खीरी। शहर से सटे कस्बा खीरी की सूत फेनी और सेंवई रमजान के महीने में स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार और पहचान दोनों का मजबूत जरिया बन गई हैं। लगभग 50 वर्षों से चल रहा यह पारंपरिक कारोबार अब जिले और प्रदेश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक अपनी पहुंच बना चुका है।
खीरी टाउन में सूत फेनी के करीब पांच कारखाने संचालित हैं। कारीगर पारंपरिक तरीके से मैदा और रिफाइंड तेल से सूत फेनी व सेंवई तैयार करते हैं, जिनमें चीनी, इलायची पाउडर और कटे हुए बादाम-पिस्ता मिलाए जाते हैं। देसी घी की सूत फेनी की भी खास मांग रहती है। दर्जनों दुकानदार इन उत्पादों को फुटकर बेचते हैं।
दुकानदार मोहम्मद अनस, मुजाहिद और राहत मंसूरी बताते हैं कि सामान्य दिनों में एक दुकान पर प्रतिदिन 10 से 15 किलो तक बिक्री होती है, जबकि रमजान में यह बढ़कर 25 से 30 किलो प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। बाजार में सूत फेनी 120 से 160 रुपये प्रति किलो बिक रही है।
कस्बा खीरी से सीतापुर, लहरपुर, लखनऊ, बरेली, पूरनपुर, पीलीभीत, बहराइच और नानपारा सहित कई जिलों में नियमित आपूर्ति होती है। रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से यह मिठास नेपाल, सऊदी अरब, दुबई, मस्कट और बहरीन तक भी पहुंच रही है, जहां रमजान में इसकी विशेष मांग रहती है।
हम लोग कई पीढ़ियों से सूत फेनी बना रहे हैं। रमजान नजदीक आते ही काम बढ़ जाता है और रोजाना देर रात तक ऑर्डर पूरे करने पड़ते हैं।
-मोहम्मद आरिफ, हलवाई
सेंवई और सूत फेनी बनाने में काफी मेहनत लगती है, लेकिन रमजान में अच्छी बिक्री होने से मेहनत का फल मिल जाता है। कारीगरों को रोजगार मिल रहा है।
-अनवर अली, हलवाई
मोहम्मद आरिफ
मोहम्मद आरिफ