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Lakhimpur Kheri News: जिले भर में सारस की ग्रीष्मकालीन गणना शुरू

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बफरजोन मैलानी रेंज की नगरिया वेटलैंड में मस्ती करते सारस। स्त्रोत-वन विभाग।
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व समेत जिले के तीनों वन प्रभागों में सारस की ग्रीष्मकालीन गणना बृहस्पतिवार से शुरू हो गई है। दो दिन की यह गणना शुक्रवार शाम पांच बजे तक चलेगी। यह गणना सुबह-शाम दो बार की जाएगी।
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नोडल अधिकारी दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ संजय बिश्वाल ने बताया कि गणना हर साल दो बार पूरे प्रदेश में एक साथ की जाती है। ग्रीष्मकालीन गणना जून और शीतकालीन दिसंबर में होती है। इस बार पूरे सूबे में 20 व 21 जून को एक साथ सारस गणना कराई जा रही है। इसके लिए सारस की उपलब्धता वाले स्थलों को पहले ही चिह्नित कर लिया गया है।
सारस गणना के लिए दक्षिण खीरी, उत्तर खीरी वन प्रभाग, पथ वृक्षारोपण और दुधवा को मिलाकर कुल 24 रेंज हैं। गणना के लिए प्रत्येक रेंज में दो-दो टीमें गठित की गई हैं। रेंजवार की जा रही गणना में 48 टीमें कार्य कर रही हैं। यह टीमें एक साथ गणना स्थलों पर सुबह छह से आठ व शाम चार से छह बजे के बीच गणना करेंगी।
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टीमें सारस को देखकर उनकी गिनती अंकित करेंगी। 22 जून को इस गणना का मिलान किया जाएगा।
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नम स्थानों और खेतों में पाए जाते हैं राजकीय पक्षी सारस
सारस ज्यादातर नम भूमि वाले खेतों, सीपेज इलाके में तालाबों के अलावा वेटलैंड और झीलों के किनारे पाए जाते हैं। अपेक्षा के अनुसार इनकी संख्या न बढ़ने का सबसे बड़ा कारण खेतों में बड़ी मात्रा में कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल है। जिसकी वजह से अनाज और पानी विषैला हो रहा है, जो सारसों की वृद्धि में बाधक है। वर्ष 2023 में हुई ग्रीष्मकालीन गणना में उत्तर प्रदेश में 19522 और जिले में 163 सारस दिखाई दिए थे। इनमें 140 वयस्क और 23 बच्चे शामिल थे। इस साल कितने सारस दिखाई देते हैं। इसका पता गणना के बाद ही लग सकेगा।
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प्रदूषण की वजह से नहीं बढ़ पा रही संख्या
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई ) के पूर्व प्रोजेक्ट हेड और वन्यजीव विशेषज्ञ पीसी पांडेय का कहना है कि पर्यावरण और जल प्रदूषण की वजह से जिले में सारस की संख्या तेजी से घट रही है। यह पक्षी अपनी बनावट और आकर्षण के लिए जाना जाता है। घटती संख्या के पीछे एक कारण शिकार भी है। जलाशयों पर शिकारी जहरीले दाने बिखेर कर सारसों को जाल में फंसाकर शिकार कर लेते है।
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शासन के निर्देश पर जिले के तीनों वन प्रभागों में एक साथ सारस की गणना कराई जा रही है। रेंजवार हो रही इस गणना को कंपाइल कर इसकी रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) लखनऊ को भेजी जाएगी।
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- संजय बिश्वाल, डीएफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग
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