लखीमपुर खीरी। जिले में गन्ना पेराई सत्र खत्म हुए काफी समय बीत चुका है। चीनी का उत्पादन हो चुका है। एथनॉल भी तैयार होकर बाजार तक पहुंच रहा है, लेकिन हजारों किसानों का हिसाब अब भी अधूरा है।
बजाज समूह की तीन चीनी मिलों पर किसानों का 780 करोड़ 20 लाख रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। भुगतान न मिलने से किसान अपनी मेहनत की कमाई के लिए इंतजार कर रहे हैं।
जिले में नौ चीनी मिलों में तीन बजाज समूह की हैं। बजाज को छोड़कर अन्य सभी चीनी मिलें शत-प्रतिशत भुगतान कर चुकी हैं। जिले में 3.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना उत्पादन होता है। बीते पेराई सत्र में जिले के 3,91,639 किसानों ने गन्ना बेचा। इनमें से 3,54,340 किसानों को भुगतान मिल चुका है। करीब 37,319 किसानों ने बजाज समूह की चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति किया था, वे भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।
गन्ना विभाग की ओर से बजाज चीनी मिलों को बार-बार नोटिस जारी किए जा रहे हैं, लेकिन मिल प्रबंधन पर इसका अपेक्षित असर नहीं दिख रहा है।
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350.64 लाख लीटर किया एथनॉल उत्पादन
जिले की नौ चीनी मिलों में छह मिलें एथनॉल का उत्पादन करती हैं, जिनमें बजाज समूह की तीनों मिलें शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, बीते पेराई सत्र में गोला चीनी मिल ने 138.74 लाख लीटर, पलिया चीनी मिल ने 105.25 लाख लीटर और खंभारखेड़ा चीनी मिल ने 106.65 लाख लीटर एथनॉल का उत्पादन किया। तीनों मिलों का कुल उत्पादन 350.64 लाख लीटर रहा। अनुमानित 60 से 70 रुपये प्रति लीटर की दर से एथनॉल की बिक्री होती है। यह उत्पादन केवल एक पेराई सत्र का है, जबकि वर्ष में दो पेराई सत्र होते हैं। किसानों का कहना है कि चीनी के साथ एथनॉल उत्पादन और बिक्री के बावजूद भुगतान में लगातार देरी हो रही है।
मैली और खोई से भी होती है आय
चीनी और एथनॉल के अलावा चीनी मिलों को मैली और खोई से भी आय होती है। हालांकि इनके उत्पादन का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं हो सका। मैली से खाद सहित कई उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जबकि खोई का उपयोग मिल संचालन में भी होता है।
लिमिट के चलते चीनी भी नहीं लेते किसान
वर्ष 2019 में गन्ना मूल्य भुगतान न होने पर किसानों को अपने मूल्य के बदले चीनी लेने की सुविधा दी गई थी। शुरुआत में कई किसानों ने इसका लाभ उठाया, लेकिन एक माह में दो क्विंटल की सीमा तय होने के बाद किसानों ने इसमें रुचि कम दिखानी शुरू कर दी। किसानों का कहना है कि पहले कागजी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, फिर परिवहन खर्च उठाना पड़ता है और बाद में चीनी औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ती है, जिससे नुकसान होता है।
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फीस और इलाज का खर्च भी मुश्किल
गन्ना भुगतान न मिलने से किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। खेती की अगली तैयारियों, खाद-बीज की खरीद, मजदूरी भुगतान और घरेलू खर्चों के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि बच्चों की फीस, चिकित्सा खर्च और अन्य जरूरी जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो रहा है।
एक नजर : बजाज मिलों का गन्ना भुगतान
(लाख रुपये में)
चीनी मिल
खरीदा गन्ना
भुगतान
प्रतिशत
बकाया भुगतान
गोला
490.85
177.56
36.17
313.29
पलिया 387.05
143.66
37.12
243.52
खंभारखेड़ा 387.84
164.32
42.37
223.52
गोला बजाज चीनी मिल को अपना गन्ना बेचते हैं, लेकिन कभी भी भुगतान समय पर नहीं मिल पाता है। इस वजह से गन्ना भुगतान न होने से आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता है।
-संतोष वर्मा, किसान, गोला
बजाज चीनी मिल गन्ना लेने में तो आगे रहती है, लेकिन भुगतान आज तक समय पर नहीं दिया। भुगतान के लिए कई बार विरोध प्रदर्शन भी किया जा चुका है, जबकि चीनी मिल प्रबंधन अपने काम कराती रहती है।
- रामकिशुन, किसान, बौधिया कलां
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बैंक लिमिट न होने के कारण टैगिंग आदेश का पालन करते हुए चीनी बिक्री से प्राप्त धनराशि का 90 प्रतिशत भुगतान कर दिया है। इस समय चीनी बिक्री कम होने के कारण भुगतान थोड़ा बिलंब हो रहा है। जल्द ही भुगतान करने का प्रयास किया जा रहा है।
-सतीश श्रीवास्तव, पीआरओ, बजाज चीनी मिल
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बकाया भुगतान को लेकर 12 जून को गन्ना आयुक्त ने बजाज चीनी मिलों को वसूली प्रमाण-पत्र निर्गत कर दिया है। डीएम ने भी 17 जून को आयोजित बैठक में गन्ना बकाया भुगतान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि अन्य स्रोतों से भुगतान कराया जाए। विभाग की ओर से भी समय-समय पर बैठकों और नोटिसों के माध्यम से भुगतान कराने का प्रयास किया जा रहा है।
- जितेंद्र कुमार मिश्र, जिला गन्ना अधिकारी
संतोष वर्मा- फोटो : 1