दुधवा नेशनल पार्क के पूर्व अवैतनिक वन्यजीव प्रतिपालक हेमंत ब्रह्म चंदेल का मानना है कि मौसम चक्र में बदलाव से जंगलों की आबोहवा भी बदल रही है। इसके साथ ही बाघ और तेंदुओं के स्वभाव में भी बदलाव आ रहा है।
जंगल की बदलती आबोहवा और बाघ, तेंदुओं के बदलते स्वभाव पर अब अध्ययन किया जाना चाहिए और उसके अनुसार बाघ संरक्षण की योजना बनानी चाहिए। वन्यजीव विशेषज्ञ केके मिश्र भी बाघ और तेंदुओं की मौत की जांच के साथ बदलते वातावरण और हालात पर अध्ययन की बात कह रहे है।
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प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट टाइगर) सुनील चौधरी ने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की हो रही मौतों की जांच कई स्तरों पर चल रही है। बाघों की मौत का कारण तलाशा जा रहा है। जरूरत हुई तो बाघों के स्वभाव में कथित तौर पर आ रहे बदलाव का भी अध्ययन कराया जाएगा।