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जान जोखिम में डालकर बच्चे कर रहे पढ़ाई

Thu, 09 Jul 2015 07:00 PM IST
निघासन
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तराई इलाके में जान जोखिम मेें डालकर नौनिहाल पढ़ाई कर रहे हैं। कहीं पर जर्जर विद्यालय, तो कहीं निकलने का रास्ता न होने के कारण बच्चे नाव पर बैठकर अपना भविष्य तराशने के लिए स्कूल जाते हैं। क्षेत्र में चार उच्च तथा 26 प्राथमिक विद्यालयों को जर्जर घोषित किया गया है, लेकिन अब तक उनमें लाल निशान नहीं लगाया गया है। शारदा, सरयू, सुहेली, कौड़ियाला, मोहाना आदि नदियों से चारों तरफ से घिरे इस तहसील में पढ़ाई के लिए बच्चों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
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बैलहा, पुरैना, मदनापुर, लालबोझी, ठाकुरपुरवा आदि गांवों के बच्चों को बरसात में पढ़ने के लिए बाढ़ के पानी से होकर गुजरना पड़ता है। बैलहा और ठाकुरपुरवा गांव के बच्चे नाव से बहतिया नाला पार करके स्कूल जाने को मजबूर हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्कूलों का निर्माण तो किया जाता है, लेकिन बाढ़ के कारण यह भवन बहुत जल्द जर्जर हो जाते हैं। खास यह है कि बाढ़ के समय विस्थापित ग्रामीणों को भी इन जर्जर स्कूल भवनों में ठहरा दिया जाता है। लिहाजा जर्जर भवनों में जानलेवा हादसे की आशंका बनी रहती हैं।
खंड शिक्षा अधिकारी संजय शुक्ला ने बताया कि जर्जर स्कूल भवनों की लिस्ट बनवाकर तैयार कर ली गई है, जिन स्कूलों में लोग रह रहे हैं उनको भी हिदायत दी जा चुकी है। शीघ्र ही चिह्नित हुए स्कूलों में लाल निशान लगाए जाएंगे। जर्जर स्कूलों के बजाय पास में बने अतरिक्त कक्षा कक्ष में बच्चों को पढ़ाने के निर्देश अध्यापकों को दिए गए हैं।
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यह विद्यालय हुए चिह्नित
उच्च प्राथमिक विद्यालय तिकुनियां, लालापुर, मटहिया और सिंहौना। प्राथमिक विद्यालय गदनिया, भूलनपुर, रननगर, लट्ठौहा, बथुआ, रहीमपुरवा, मसुरहा, करदहिया, बरूही फार्म, मुर्गहा, लालपुर, कटहिया, लुधौरी, मिर्जागंज, चौधरीपुरवा, बिहारीपुरवा, मोतीपुर, ग्रंट नंबर 12, नौबना, लालापुर प्रथम, गंगानगर, खैरहनी, घोसियाना, भेड़ौरा प्रथम, नौरंगाबाद फार्म के अलावा नौरंगाबाद के प्राथमिक विद्यालय में स्थित तीन कक्षा कक्ष।
क्या कहते हैं लोग
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जर्जर स्कूलों में पढ़ाई कराना खतरे से खाली नहीं है। इन स्कूलों का बजट तैयार कर शीघ्र ही बनवाना चाहिए। खुले मैदान में बच्चों को पढ़ाना गलत है।
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-अमन दीप सिंह, उपाध्यक्ष, बेलरायां चीनी मिल  
बच्चे देश का भविष्य हैं। प्राथमिक स्कूलों के भवन के साथ ही पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
-श्रीप्रकाश शुक्ला



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