दुधवा के पालतू हाथियों ने भी दुर्गा को न केवल अपनाया बल्कि मां जैसा प्यार और दुलार भी दिया। लाड़-प्यार में पली दुर्गा की शरारतें सबको भाने लगी। दुधवा आने वाले सैलानियों का जब दुर्गा के बारे में पता चलता तो उसे देखने और मिलने से खुद को नहीं रोक पाते। बच्चों के साथ तो यह दुर्गा इस तरह घुलमिल जाती है कि जैसे बच्चे उसके दोस्त हों।
'दुर्गा' को दुधवा में रहते हुए पांच साल
दुर्गा हथिनी को दुधवा में रहते हुए पांच साल हो गए हैं। आठ फरवरी 2022 को दुर्गा दुधवा से दक्षिण सोनारीपुर रेंज के सलूकापुर बेस कैंप में भेजी गई। मौजूदा समय में उसे दुधवा टाइगर रिजर्व के सलूकापुर बेस कैंप में रखा गया है। डिप्टी रेंजर सुरेंद्र कुमार बताते हैं कि दुधवा भ्रमण के लिए आने वाले सैलानी खासकर बच्चे दुर्गा से मिले बिना नहीं रह पाते। कम उम्र होने के कारण दुर्गा से कोई काम नहीं लिया जाता है, बल्कि उसे प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
वनकर्मी को दुलार करती दुर्गा
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दुर्गा को सैलानियों का अभिवादन करने, उनके गले में माला डालने और फुटबाल खेलने का प्रशिक्षण दिया गया है। वह यह गतिविधियां आनंदपूर्वक करती है। वन कर्मियों के संग फुटबॉल खेलना उसकी दिनचर्या में शामिल हो गया है। बिना फुटबॉल खेले दुर्गा एक दिन भी नहीं रह सकती।
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक बी. प्रभाकर ने बताया कि पांच साल पहले दुधवा लाई गई नन्हीं हथिनी दुर्गा सभी की दुलारी है। दुधवा आने वाले सैलानियों खासकर बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उसके स्वास्थ्य, खानपान और प्रशिक्षण पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।