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श्रीराधाकृष्ण मंदिर में मूर्ति स्थापना महोत्सव आज से

Sun, 19 Apr 2015 06:38 PM IST
गोला गोकर्णनाथ
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छोटी काशी में रेलवे स्टेशन से शिव मंदिर जाने वाले मार्ग पर स्थित प्राचीन श्रीराधाकृष्ण मंदिर में 20 अप्रैल से देव प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा के लिए धार्मिक उत्सव होंगे। आयोजक हरद्वार वाजपेयी ने बताया कि 20 अप्रैल को श्री रामचरित मानस पाठ, 21 को पाठ समापन और संगीतमय सुंदरकांड पाठ, 22 को ध्वजारोहण, कलश शोभायात्रा, वेदी रचना, मंडप प्रवेश, पंचांगदेव पूजन, 23 को वेदी पूजन, देव आवाहन, अग्नि प्रवेश, मूर्ति जलाधिवास, दुग्धाधिवास, रसाधिवास कार्यक्रम होंगे।
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24 को देव पूजन, यज्ञाहुति एवं अन्नाधिवास, फलाधिवास, पुष्पाधिवास, शर्कराधिवास व आरती होगी। 25 अप्रैल को पुन: वेदी पूजन, यज्ञाहुति, प्रतिमा स्नान कर मूर्ति शोभायात्रा निकाल कर शाम शयनाधिवास आरती, 26 को मूर्ति जागरण, मूर्ति न्यास, यज्ञ वेदी पूजन, एवं मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा होकर यज्ञ पूर्णाहुति होकर भगवान की आरती कर प्रसाद वितरण होगा। 27 अप्रैल को कन्या भोज व भंडारा के साथ उत्सव का समापन होगा।
18वीं शताब्दी में बना था देवालय
श्री राधाकृष्ण मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में कालिका प्रसाद वाजपेयी ने कराया था। मंदिर के गर्भ गृह में करोड़ों रुपयों की मूल्यवान अष्टधातु की मूर्तियां स्थापित करवाई थी जो 26 वर्ष पूर्व चोरी हो गईं थीं। देव प्रतिमाओं की चोरी का मुकदमा घटना के दूसरे दिन विजय कुमार वाजपेयी ने दर्ज कराया था। घटना के कई माह बाद पुलिस ने मूर्ति का स्टैंड मंदिर के समीप ऐसे स्थान से बरामद किया। जहां सिर्फ वादी और आरोपी के अलावा कोई नहीं पहुंच सकता था लेकिन पुलिस ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। विजय वाजपेयी के आवेदन पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए किंतु खुलासा नहीं हो सका। बाद में सुप्रिम कोर्ट ने मामले को सीबीआई के हवाले किया तो सीबीआई के एसपी ने मौके पर आकर जांच पड़ताल कर कई लोगों के भी बयान लिए और अपनी आख्या में पुलिस जांच का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया।
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मंदिर का हुआ है सौंदर्यीकरण
ढाई बीघा जमीन में बने मंदिर परिसर में 18 कमरे, तीन हाल, पुष्प वाटिका, कुआं, गर्भ गृह व परिक्रमा स्थल है। अब हरद्वार वाजपेयी ने मंदिर व कमरों की फर्श पर सफेद पत्थर व दीवारों पर टाइल्स लगाकर रंग रोगन कर सौंदर्यीकरण करावाया है। मंदिर में स्थापित करने के लिए श्रीराधाकृष्ण की संगमरमर की चार फुट की प्रतिमाएं जयपुर से लाई गई हैं जो देखने में सजीव मालूम होती हैं।
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