गोला गोकर्णनाथ। कोरोना का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ कि बर्ड फ्लू ने हड़कंप मचा दिया। निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र पशुपालन उत्तर प्रदेश की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश भर में 2035 परीक्षणों में मात्र 11 पक्षियों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पक्षियों की मौत का कारण सर्दी का प्रकोप और फसलों पर कीटनाशक का स्प्रे किया जाना बताया है।
मानव पर असर नहीं डालता एवियन इनफ्लुएंजा का स्ट्रेन
उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद फारुख ने बताया कि निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र पशुपालन प्रदेश शासन की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि बर्ड फ्लू वर्तमान में जंगली पक्षियों की बीमारी एवियन इनफ्लुएंजा का एक रूप है, जिसका स्ट्रेन एच 5 एन 1 मानव पर असर नहीं डालता। 15 जनवरी तक प्रदेश में स्वैब 2811, सीरम 1013 और 43 मृत पक्षी जांच के लिए भेजे गए थे। कुल 2035 परीक्षणों में महज 11 पक्षियों के सैंपल पॉजिटिव आए हैं। इसलिए प्रवासी पक्षियों पर विशेष नजर रखने की जरूरत है। पक्षियों की मृत्यु का प्रमुख कारण सर्दी का प्रकोप और फसलों पर कीटनाशक का स्प्रे है।
70 सेंटीग्रेड तापमान पर तीन सेकंड में नष्ट हो जाता है वायरस
पशुपालन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, एवियन इनफ्लुएंजा का वायरस 70 डिग्री तापमान पर तीन सेकंड में ही नष्ट हो जाता है। इसलिए 70 डिग्री सेंटीग्रेड पर भली-भांति पकाया गया मीट या अंडे का सेवन करने से भी कोई खतरा नहीं है।
संक्रमित क्षेत्र के दस किलोमीटर परिधि में रहेगा प्रतिबंध
प्रदेश शासन की आई रिपोर्ट के अनुसार, जंगली पक्षियों में संक्रमण के दृष्टिगत पोल्ट्री उत्पाद के इधर-उधर ले जाए जाने से प्रतिबंध हटा लिया गया है। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद फारूक ने बताया कि यदि किसी क्षेत्र में कोई संक्रमित मिलता है तो उस समिति क्षेत्र के 10 किलोमीटर परिधि में किसी के आने जाने मृत या जीवित पक्षियों के लाने ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा।
एहतियात जरूरी
उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि तहसील क्षेत्र में अलग-अलग टीमें गठित कर अभियान चलाया जा रहा है। प्रति माह 30 से अधिक पक्षियों की सैंपलिंग कराई जाती है। यदि कहीं कोई पक्षी मृत मिलता है तो चिकित्सा अधिकारियों को सूचित करें। हालांकि जंगली पक्षियों में पाई जा रही बीमारी का इंसान पर कोई प्रभाव नहीं डालता फिर भी एहतियात जरूरी है।