सुर्खियों में आने के लिए टावर पर चढ़कर धमकी देना रवींद्र गुप्ता का शगल है। कई साल पहले भी गन्ना भुगतान की समस्या और इसी साल पशु तस्करी को लेकर वह टावर पर चढ़ा था। मीडिया ने उसे अच्छीखासी कवरेज दी थी। उसका कहना है कि उसे टावर पर चढ़ना और फिर छपना अच्छा लगता है।
पुलिस हिरासत में रविंद्र ने बताया कि कई साल पहले दो अक्तूबर को शाहजहांपुर के कलान स्थित मकरंद सिंह इंटर कॉलेज में लगे टॉवर पर गन्ना भुगतान की समस्या को लेकर चढ़ा था। उस समय पुलिस ने उसे पकड़कर जेल भेजा था। तब मीडिया ने उसे हीरो बना दिया था। यह उसे अच्छा लगा। इस साल की शुरुआत में एक गाड़ी में गोमांस पकड़े जाने पर बेजुबान पशुओं की हत्या रोकने की मांग को लेकर इसी टॉवर पर चढ़ा। तब भी टीवी पर दिखाया गया और अखबारों में खूब छपा। इस बार उसका मकसद यही था। उसके दिमाग में आया कि वह यदि दरोगा के गांव हरदासपुर के पास के कसबे के किसी टॉवर पर चढ़ जाए तो वह सुर्खियों में आ सकता है। वह रात ही शाहजहांपुर पहुंच गया। रोडवेज बस अड्डे पर रुका और तड़के रोडवेज बस से लखीमपुर पहुंचा, फिर लगुचा पहुंचा। यहां उसने टॉवर की तलाश की और चहारदीवारी फांदकर घुसा और चढ़ गया। चिल्लाकर लोगों की भीड़ जुटा ली और अपने मकसद में कामयाब हुआ।