लखीमपुर खीरी। जिला जेल के बंदियों और कैदियों को अब ठंडी रोटी नहीं खानी पड़ेगी। उन्हें पांच घंटे बाद भी गर्म रोटी जेल प्रशासन मुहैया कराएगा। नवागत जेल अधीक्षक ने जेल को मॉडल जेल बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इसी क्रम में जेल की पाकशाला को भी आधुनिक बनाया जा रहा है।
जिला जेल में कुल 1833 बंदी और कैदी हैं, जो सलाखों के पीछे अपने कर्मों की सजा भोग रहे हैं। जिला जेल की पाकशाला में आटा गूंथने, रोटी बनाने और गूंथे आटे के गुल्ले काटने की मशीन पहले से ही थी, जिससे प्रतिदिन दोनों पहर 15 से 20 हजार रोटियां बनाई जाती हैं। इन रोटियों को रखने के लिए पहले कोई ऐसा प्रबंध नहीं था, जिससे रोटी गर्म रहे। इससे आधे से अधिक बंदियों को मजबूरन ठंडी रोटी ही खानी पड़ती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
बंदी और कैदी पांच घंटे बाद भी गर्म रोटी खा सकेंगे। नवागत जेल अधीक्षक पीपी सिंह ने इसको लेकर पहल शुरू की है। बंदियों को गर्म रोटी उपलब्ध कराने के लिए 15 हॉटकेस मंगवाए जा रहे हैं। इन हॉट केसों के जल्द ही आने की उम्मीद है। इस पर विभाग को करीब 15 से 20 हजार रुपये खर्च करने होंगे।
बंदी-कैदियों की यह है दिनचर्या
जेल में बंदियों और कैदियों को सुबह पांच बजे उठना पड़ता है। नित्यक्रिया से निपटने के बाद गणना में शामिल होते हैं। गणना पूरी होने के बाद आठ बजे चाय और नाश्ता दिया जाता है।
यह है जेल के खाने का मेन्यू
नाश्ते में मंगलवार, शनिवार को चना, बुधवार, शुक्रवार और रविवार को दलिया दिया जाता है। सोमवार और बृहस्पतिवार को डबल रोटी दी जाती है। प्रतिदिन शाम को 45 ग्राम गुड़ भी दिया जाता है। सुबह 11 बजे भोजन में दाल, चावल, सब्जी, रोटी दोनों समय दी जाती है। दाल का शेड्यूल निर्धारित है, जिसमें अरहर, उड़द, उड़द राजमा, चना, मसूर, खड़ी मसूर शामिल है। पहले और तीसरे रविवार को विशेष भोजन में पूड़ी, सब्जी, हलुआ और रवे का हलुवा शामिल है। दूसरे रविवार को कढ़ी और चावल खिलाया जाता है।
जेल के रोटी प्लांट में कुछ कमियां हैं, जिन्हें दूर कराया जा रहा है। बंदियों को गर्म रोटी मिले, इसको लेकर करीब 15 हॉटकेस मंगवाए गए हैं, जिन पर 15 से 20 हजार रुपये का खर्च आएगा। हॉटकेस आने के बाद जेल का रोटी प्लांट पूरी तरह से आधुनिक हो जाएगा।
- पीपी सिंह, जेल अधीक्षक