लखीमपुर खीरी। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईएस) में कार्य आवंटन और तैनाती को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कुछ जूनियर इंजीनियरों को एक साथ कई ब्लॉक, विधायक-सांसद निधि और विभिन्न योजनाओं का जिम्मा सौंपा गया है, जबकि कुछ को कार्यालय तक सीमित रखा गया है। एक ही पटल पर लंबे समय से तैनाती की गोपनीय शिकायत शासन तक पहुंचने के बाद विभाग में हलचल मच गई है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, जेई प्रदीप वर्मा के पास लखीमपुर सदर, नकहा ब्लॉक, डीआरडीए, विधायक निधि, खीरी सांसद निधि और जिले की क्रिटिकल गैप योजना का प्रभार है। जेई मनीष गिरि के पास गोला, बांकेगंज ब्लॉक, दो विधायक और एक एमएलसी निधि का जिम्मा है। जेई पवन मौर्य ईसानगर ब्लॉक, धौरहरा सांसद निधि के अलावा कई अन्य निर्माण कार्य देख रहे हैं।
इसी तरह अजय वर्मा के पास फूलबेहड़, हिमांशु वर्मा के पास रमियाबेहड़ और पलिया, ब्रजेश कुमार के पास बिजुआ, प्रतीक श्रीवास्तव के पास निघासन, रामभवन के पास पसगवां, करन सिंह के पास मोहम्मदी, अमित वर्मा के पास धौरहरा तथा केके रसिक के पास मितौली ब्लॉक का प्रभार है। जेई सुरेंद्र वर्मा के पास कई वर्षों से प्रयोगशाला और बेहजम ब्लॉक के साथ अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं, जबकि मृदुल शुक्ला और अनिल कुमार को कार्यालय से संबद्ध रखा गया है।
अधिशासी अभियंता का पक्ष नहीं मिल सका
इस संबंध में अधिशासी अभियंता हेमंत सक्सेना से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने न फोन रिसीव किया और न ही व्हाट्सएप मेसेज का जवाब दिया। उनके पास प्रयागराज में अधीक्षण अभियंता का भी अतिरिक्त प्रभार है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, वे अधिकांश समय वहीं रहते हैं और कभी-कभार ही जिले में आते हैं।
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ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में जेई सहित सभी पटलों और कार्यक्षेत्रों की जानकारी ली जाएगी। यदि नियमों की अनदेखी कर तैनाती दी गई है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी और व्यवस्था में सुधार कराया जाएगा।
-अभिषेक कुमार, सीडीओ