यह है मान्यता
यहां जो देवतीर्थ हैं उसमें गोदावरी नदी से जल लाकर प्रतिष्ठित करवाया गया था। उसके साथ त्र्यंबकेश्वर सहित द्वादश ज्योतिर्लिंगों की स्थापना कराई। कालसर्प योग दोष शांति का मुख्य स्थान नासिक है और उसके बाद देवकली तीर्थ स्थल है। क्योंकि कालसर्प योग दोष शांति के लिए त्रयंबकेश्वर एवं गोदावरी नदी के जल का होना आवश्यक है।
किवदंती है कि देवकली में राजा परीक्षित के पुत्र राजा जन्मेजय ने सर्प विनाश यज्ञ किया था। सर्पों के भांजे आस्तिक मुनि ने राजा जन्मेजय से तक्षक नाग की आहुति दान में मांगकर संपूर्ण सर्प जाति को बचा लिया था। तभी से देवकली तीर्थ स्थल से सर्पों का विशेष लगाव हो गया। यज्ञ करने वाले कुंड में नाग पंचमी के दिन लोग स्नान करते हैं। कुंड की मिट्टी घर ले जाते हैं। क्षेत्र के दर्जनों सपेरे नाग लेकर आते हैं। मेले में आने वाले श्रद्धालु नागों को दूध पिलाते हैं और पूजा पाठ भी करते हैं।