बेलरायां में खाद की तीन दुकानें सीज होने के बाद भी खाद की तस्करी रुकने का नाम नहीं ले रही है। भारत-नेपाल सीमा पर बह रही मोहाना नदी के घाटों से खाद की तस्करी बेरोकटोक जारी है। तहसील क्षेत्र के किसान खाद पाने के लिए सहकारी समितियों और दुकानों के चक्कर काटने को विवश हैं।
नेपाल में यूरिया, डीएपी, एनपीके आदि खादों के दाम दोगुने होने के कारण बार्डर इलाके के लोग साइकिल, मोटरसाइकिल से दिन में और रात में ट्रैक्टर, ट्रॉली, पिकअप, तांगा, डनलप आदि से खाद की तस्करी नेपाल को करते है। बेलरायां, तिकुनियां, सिंगाही के अलावा उमरा, कुसाही, सिंहौना आदि स्थानों पर खाद की दुकानों पर सबसे ज्यादा खाद खपत होती है। कृषि क्षेत्र के दृष्टिकोण से भी यदि देखा जाए तब भी यहां पर कृषि का क्षेत्रफल कम है, इसके बावजूद यह खाद कहां जाती है। गेहूं, लाही आदि फसलों में यूरिया डालने के लिए किसान सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सहकारी समितियों पर यूरिया नहीं मिल रही है। मोहाना नदी पर बने घाटों से शाम छह बजे से आवागमन बंद होने का आदेश है। इसके बावजूद शाम ढलने के बाद तस्कर खाद की तस्करी करते हैं।
इन घाटों से होती है तस्करी
गुलरिहा, मरिया, खखरौला, चौगुर्जी कौड़ियाला घाट के अलावा कौआखेड़ा, डाक्टर, चोर घाट समेत करीब एक दर्जन घाटों से खाद की तस्करी की जाती है।
चौकसी के लिए लगी है बार्डर पर 19 एजेंसियां
एसएसबी, कस्टम, पुलिस समेत 19 एजेंसियां तस्करी और सीमा सुरक्षा के लिए लगाई गई हैं। इसके बावजूद यहां पर तस्करी होती है।
तृतीय वाहिनी सेनानायक एसएसबी कमल भगत ने बताया कि खाद की तस्करी की शिकायत मिली है मामले में छापामारी की जाएगी। खाद के दुकानों की रिपोर्ट भी शासन को भेजी गई है। तस्करी रोकने का पूरा तानाबना बुना जाएगा।