लखीमपुर खीरी। मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी यह बड़ी चुनौती बनी हुई है। जागरूकता की कमी और सामाजिक संकोच के कारण महिलाएं और किशोरियां कई समस्याओं से जूझ रही हैं।
जिला अस्पताल के साथिया केंद्र की काउंसलर दीपमाला ने बताया कि केंद्र पर प्रतिदिन औसतन 10 से 15 किशोरियां परामर्श के लिए पहुंच रही हैं। इनमें अधिकांश किशोरियां माहवारी में अनियमितता, अधिक दर्द, सफेद पानी आने, त्वचा संबंधी समस्याओं और तनाव की शिकायत लेकर आती हैं।
उन्होंने बताया कि आज भी कई गांवों में मासिक धर्म पर खुलकर बातचीत नहीं होती। सही जानकारी न मिलने से किशोरियां झिझक और भ्रम में रहती हैं। कई महिलाएं सेनेटरी पैड की जगह पुराने कपड़ों का इस्तेमाल करती हैं। इन्हें सही तरीके से साफ और सुखाया न जाए तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि मासिक धर्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि महिलाओं की सामान्य जैविक प्रक्रिया है। इस दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। समय-समय पर सेनेटरी पैड बदलना, साफ पानी का इस्तेमाल और शरीर की साफ-सफाई संक्रमण से बचाने में मदद करती है।
चिकित्सकों के अनुसार मासिक धर्म के दौरान लापरवाही बरतने से यूरिन संक्रमण, त्वचा रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
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साथिया केंद्र में खुलकर रख रहीं अपनी बात
मासिक धर्म और उससे जुड़ीं भ्रांतियों को दूर करने के लिए जिला महिला अस्पताल समेत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर साथिया केंद्र बनाए गए हैं। यहां महिला काउंसलर तैनात हैं, ताकि किशोरियां और महिलाएं खुलकर अपनी समस्याएं बता सकें और उचित परामर्श व दवाएं प्राप्त कर सकें।