शुक्रवार को जिला और महिला अस्पताल में गिनती के ही आए मरीज
शुक्रवार को कर्फ्यू के कारण जहां सड़कें सुनसान रहीं। वहीं जिला और महिला अस्पताल में भी सन्नाटा पसरा रहा। दोनों अस्पतालों में सिर्फ गिनती के ही मरीज पहुंचे। वहीं निजी अस्पतालों में भी इक्का-दुक्का ही मरीज पहुंच सके। अधिकतर निजी अस्पतालों के गेट पर ताला लटका रहा, जिससे मरीजों के घरवालों उसी में कैद रहे।
अस्पताल स्टाफ के बने परिचय पत्र
लखीमपुर खीरी। शुक्रवार को कर्फ्यू के दौरान लोगों के आने जाने पर पुलिस की कड़ी नजर रही। पुलिस ने पूछताछ करके ही लोगों को जाने दिया। इस दौरान जिला अस्पताल के डॉक्टर, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय को भी पुलिस पूछताछ की कार्रवाई से गुजरना पड़ा। शनिवार को ड्यूटी आने के दौरान स्टाफ के लोगों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए सीएमएस डॉ.मनोज कुमार ने सभी के परिचय पत्र जारी किए हैं।
डॉक्टरों के बंद रहे कक्ष
लखीमपुर खीरी। शुक्रवार को मरीजों के न आने के कारण डॉक्टर के कक्ष बंद रहे। इस दौरान गिने-चुने जो मरीज जिला अस्पताल पहुंचे भी उनका इलाज इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर ने किया और दवा वितरण कक्ष में मौजूद फार्मेसिस्ट सरिता गुप्ता ने मरीजों को दवाएं दी।
इमरजेंसी बनी सामान्य मरीजों का सहारा
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में कर्फ्यू के चलते शुक्रवार को सन्नाटा पसरा रहा। अस्पताल तक सिर्फ गंभीर मरीज ही पहुंच सके। शुक्रवार को जिला अस्पताल में करीब 80 और महिला अस्पताल में करीब पचास पर्चे ही बने, जबकि जिला अस्पताल में रोजाना हजार-बारह सौ और महिला अस्पताल में चार-पांच सौ पर्चे बनते हैं। महिला अस्पताल में मौजूद डॉ.प्रियंका ने बताया कि सुबह से उन्होंने करीब 25 मरीज देखे हैं जबकि अन्य दिनों में यह संख्या सौ के ऊपर निकल जाती है।
एक भी नहीं हो सका आपेरशन
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में शुक्रवार को करीब छह लोगों के आपरेशन होने थे, लेकिन कर्फ्यू के चलते एक भी आपरेशन नहीं हो सका।
प्रसूताओं को नहीं मिला दूध
लखीमपुर खीरी। जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं को सुबह 250 एमएल दूध और नाश्ता तथा दोनों समय का खाना दिया जाता है, लेकिन शुक्रवार को कर्फ्यू ने दूध पर ग्रहण लगा दिया। शुक्रवार को डेरियां न खुल पाने का कारण प्रसूताओं को दूध नहीं बांटा जा सका।