द्वितीय नवरात्र: माता ब्रह्मचारिणी का पूजन
नवरात्र के दिन दूसरे जिले भर में मां के दूसरे स्वरूप माता ब्रह्मचारिणी का पूजन हुआ। ब्रह्मा जी की शक्ति होने से मां का नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप के पूजन को लेकर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सुबह होते ही मां के भक्तों ने मां संकटा देवी, मां बंकटा देवी और शीतला माता मंदिर पहुंचना शुरू कर दिया। मंदिर पहुंचे भक्तों ने कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए पूजन किया। उधर घरों में भी मां का विधिविधान से पूजन किया गया। ऐसे में घर से लेकर मंदिरों में मां के जयकारे लगते रहे।
गोला गोकर्णनाथ। नगर के मां मंगला देवी मंदिर, रक्षा देवी मंदिर, मां दुर्गा मंदिर आदि देवी मंदिरों में सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं ने पूजन किया। घरों में श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की। चीनी मिल की पुरानी कॉलोनी में मां वैष्णो दरबार में एसडीएम अखिलेश यादव, फैक्टरी मैनेजर आरके मिश्र, शैलेंद्र सक्सेना, अनुज खरे, दीपू लाला, राजेश शुक्ल, अतुल पुरवार, बब्बू अवस्थी आदि ने मां ज्वाला की ज्योति और मां वैष्णो का पूजन किया।
ममरी। सुंदरपुर गांव के माता भगवती सत्संग स्थल पर हो रहे सात दिवसीय शतचंडी यज्ञ के दूसरे दिन मंडप में अग्नि प्रवेश, वेदी रचना, पंचांग पूजन, देव आवाहन के कार्यक्रम संपन्न हुए यज्ञाचार्य आनंद कृष्ण शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्धालुओं से पूजन संपन्न कराया। आयोजक प्रधान प्रतिनिधि रामकुमार वर्मा ने बताया कि मंदिर में दुर्गा माता मूर्ति की स्थापना 23 अक्तूबर को पूर्णाहुति के साथ की जाएगी। इस मौके पर रामभरोसे वर्मा, बाबूराम वर्मा, सुनील वर्मा, विक्रम सिंह, प्रखर पटेल समेत तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे। संवाद
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मां शीतला के साथ दस
विद्याओं के होते हैं दर्शन
भगवान श्रीकृष्ण ने की थी मूर्ति स्थापित
लखीमपुर खीरी। शहर के मोहल्ला हाथीपुर स्थित मां शीतला देवी मंदिर पौराणिक गाथाओं का गवाह है। विशाल गुंबद के नीचे मां शीतला देवी की अष्टभुजी मूर्ति स्थापित है। इस मंदिर का इतिहास भी महाभारत कालीन बताया जाता है। कहा जाता है कि मंदिर में मूर्ति भगवान श्रीकृष्ण ने स्थापित की थी। मां का यह मंदिर भी नगर की चार देवी शक्तिपीठों में एक है। मंदिर गेट के बिल्कुल सामने मां दुर्गा की मूर्ति विराजमान है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर की देखरेख महेवा राज्य का राज परिवार और पुरोहित रमेश कुमार मिश्रा करते हैं।
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नौ स्वरूपों के एक साथ होते हैं दर्शन
यहां पर नौ देवियों के दर्शन अलग अलग रूपों में होते हैं। इसी के साथ दस महाविद्या की मूर्तियां भी स्थापित हैं।
ये हैं दस महाविद्या
मां दक्षिणकाली, मां तारा, मां षोदशी त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां धूमावती, मां बंग्लामुखी, मां मातंगी, मां छिन्नमस्ता, मां भैरवी, मां कमला
सैकड़ों साल पुराना है मंदिर
माता का मंदिर महाभारतकालीन है। गर्भगृह का निर्माण 1802 में महेवा स्टेट के राजा ने कराया था। इसके बाद पूर्व डीआईजी अरुण शुक्ला ने नव दुर्गा व दस महाविद्या की स्थापना कराई। मां के मंदिर आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी करती हैं।
-रमेश कुमार मिश्रा पुरोहित मां शीतला माता मंदिर
मंदिर मां शीतला माता- फोटो : LAKHIMPUR