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शारदा का प्रकोप: 12 गांव बाढ़ की चपेट में

Sun, 03 Jul 2016 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो पलियाकलां।
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बारिश - फोटो : अमर उजाला
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- शारदा नदी अब खतरे के निशान से करीब 1.34 सेंटीमीटर ऊपर 
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- ऊंचे स्थानों पर ली शरण, रास्तों पर पानी चलने से कई गांवों का संपर्क टूटा
- इन गांवों में नाव ही आने जाने का सहारा
पहाड़ों और इलाकों मेें हो रही लगातार बारिश से शारदा नदी का उफान बढ़कर तबाही का सबब बन गया है। शारदा नदी अब खतरे के निशान से करीब 1.34 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है और इससे उसकी बाढ़ का पानी करीब एक दर्जन गांवों के भीतर घुस गया है। कई गांवों के संपर्क मार्ग पर भी बाढ़ का पानी चल रहा है। जिससे इन गांवों का संपर्क तहसील से कट गया है और नाव ही आवागमन का मुख्य साधन रह गईं हैं। जिन गांवों में बाढ़ का पानी ज्यादा है, उनसे लोग पलायन कर ऊंचे स्थानों की ओर आ गए हैं।
कई दिनों से पहाड़ों पर हो रही बारिश से बनबसा बैराज द्वारा अतिरिक्त पानी की रिलीजिंग बढ़ा दी गई थी। भारी बारिश के चलते शुक्रवार की रात में रिलीजिंग करीब दो लाख क्यूसेक रही थी। जिससे शारदा का उफान काफी बढ़ गया और नदी के समीपवर्ती इलाके जलमग्न होने लगे। शनिवार की सुबह रिलीजिंग में थोड़ी गिरावट आई और यह करीब 89 हजार कर दी गई, लेकिन दोपहर में फिर यह बढ़कर करीब एक लाख क्यूसेक पहुंच गई। इसके बाद भी रिलीजिंग बढ़ी, जिसमें शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 153.620 सेमी से रविवार को करीब एक मीटर 34 सेेमी ऊपर 154.960 पर जा पहुंचा। शुक्रवार से ही इलाकों में पानी भर रहा था जो अब गांवों के भीतर जा चुका है। इसमें आजाद नगर, बर्बाद नगर, दौलतापुर, श्रीनगर, कचनारा, मटहिया आदि चर संपूर्णानगर परिक्षेत्र में गोविंदनगर के मजरा संजय गांधी नगर आदि करीब एक दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी घुसा हुआ है। इसमें कुछ में जलस्तर कम है, जिससे लोग वहीं डटे हुए हैं, लेकिन गोविंद नगर के संजय नगर, आजाद नगर, बर्बाद नगर आदि में पानी का स्तर ज्यादा है। जिससे लोग वहां से पलायन कर रहे हैं। इमलिया, मेलाघाट, बिजौरिया आदि के कई संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी भरा हुआ है और यहां आवागमन ठप है। नाव ही आने जाने का सहारा हैं। 
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फसली इलाके हैं डूबे, जानवरों के चारे की किल्लत, फसल भी खराब होना तय
शारदा की बाढ़ के पानी से दर्जनों गांवों के खेतिहर इलाके डूब गए हैं। इससे गांवों में जानवरों के चारे की किल्लत हो गई है और वह भूखे प्यासे हैं। इससे इनके पालक बुरी तरह से परेशान हैं। इसके साथ ही फसलों के डूब जाने से ग्रामीण बुरी तरह परेशान हैं, क्योंकि बाढ़ में डूबने के बाद फसल का खराब होना तय माना जाता है। इलाके का किसान पहले से ही कर्ज में डूबा हुआ है। ऐसे में फसल का खराब होना उसके लिए दोहरी मार है। 

गनीमत है कि घट गई है रिलीजिंग
इलाके के बाढ़ ग्रस्त लोगों के लिए गनीमत भरी खबर है। शारदा बैराज से अतिरिक्त पानी की रिलीजिंग काफी घट रही है। रविवार की दोपहर करीब तीन बजे बनबसा बैराज से अतिरिक्त पानी की रिलीजिंग करीब 88 हजार क्यूसेक रही। जिससे उम्मीद जताई जाने लगी है कि जल्द ही शारदा का उफान थम जाएगा, बशर्ते पहाड़ों पर बारिश कम हो। 

वर्ष 2013 और 2014 में खतरे के निशान से काफी ऊपर बही थी शारदा
बता दें कि अभी शारदा नदी का जलस्तर सबसे ज्यादा वर्ष 2014 में था। इस वर्ष की 18 जून को नदी खतरे के निशान 153.628 से 155.340 पर बही थी। जो करीब 1.72 मीटर ऊपर था और इस दौरान इलाके को भारी बाढ़ का सामना करना पड़ा था। जिसमें दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। वर्ष 2013 की 21 जुलाई को भी शारदा नदी का जलस्तर करीब 155.170 था जो खतरे के निशान से 1.55  मीटर ऊपर था। माना जा रहा है कि अगर भारी मात्रा में फिर रिलीजिंग होती है तो चंद घंटों में इलाके में वही स्थिति हो सकती है। हालांकि रिलीजिंग घटी है तो इससे जलस्तर कम होने के आसार बढ़ गए हैं। 

वर्ष 2008 में देखने को मिला था खौफनाक मंजर
शारदा नदी का जलस्तर भले ही वर्ष 2014 और 2013 में सर्वाधिक रहा हो, लेकिन बाढ़ का खौफनाक मंजर वर्ष 2008 में ही देखने को मिला था। इस दौरान नदी का रुख शहरी इलाके की ओर हुआ और पूरा नगर बाढ़ के पानी से लबरेज हो गया था। नगर के मुख्य मार्गों पर तीन से चार फुट, कहीं चार से पांच फुट पानी बह रहा था तो घरों में एक से दो फुट पानी भरा हुआ था। इस वर्ष सुहेली नदी ने भी नगर में दस्तक दे दी थी, जिससे हालात बेकाबू हो गए थे। 
प्रशासन ने बांटे 60 तिरपाल
प्रशासन ने श्रीनगर, आजाद नगर, बर्बाद नगर के लोगों में 60 तिरपाल का वितरण किया है। एसडीएम ने इन गांवों का दौरा कर हालात जाने। उन्होंने बताया कि जिन स्थानों पर ज्यादा पानी है, वहां से लोगों को नाव से निकाल लिया गया है। कहा कि हालात काबू में हैं और बनबसा से रिलीजिंग घटी है। उन्होंने कहा कि बाढ़ पर नजर रखी जा रही है, किसी को दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।

.... तो खेत हुए सुहेली
- फसलें डूबी किसानों के माथे पर बल
- बढ़ते जलस्तर से गांवों में पानी घुसने की संभावनाएं
- अमर उजाला ने पहले ही जता दी थी आशंका
पलियाकलां। आखिर हुआ जिसका डर था। नेपाली दोंदा नदी का पानी लेकर बह रही सुहेली ने सिल्टिंग की वजह से मुड़ी हुई धारा के साथ दर्जनों गांवों के फसली इलाके में तबाही का मंजर शुरू कर दिया है। आलम यह है कि यहां हजारों एकड़ फसल सुहेली नदी के पानी में डूब गई है। सुहेली का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जिसके चलते गांवों में भी पानी घुसने की संभावनाएं बढ़ गईं हैं। बता दें कि अमर उजाला ने अपने मुख्य पेज पर 25 जून को सुहेली की सिल्टिंग और उसके धारा मोड़ लेने से यह हालात होने की पहले ही आशंका जता दी थी। 
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गौरतलब है कि सुहेली नदी से पलिया दुधवा मार्ग पर पड़ने वाले पुल के करीब पांच किलोमीटर उधर से भयानक सिल्टिंग कर अपना रुख बदल लिया था और नया कटान करते हुए किसानों खेतों के किनारे होकर नकउहा नाले में मिल गई थी। इससे करीब दस किलोमीटर तक नदी का नामोनिशान मिट गया। अमर उजाला ने इस गंभीर समस्या को 25 जून के अंक में प्रमुखता से मुख्य पेज और भीतरी पन्नों पर प्रकाशित कर शासन और प्रशासन को सचेत किया था। हालांकि इस पर प्रशासन जागा, लेकिन बारिश से पूर्व कार्य शुरू नहीं हो पाया। बारिश का मौसम शुरू हो गया और सुहेली ने अपनी नई धारा से अपना रंग भी दिखाना शुरू कर दिया। वह अब उफान पर है और उसके आसपास की हजारों एकड़ जमीन बाढ़ के पानी से लबरेज हो चुकी है। फसलें डूब गईं किसानों के माथों पर चिंता की लकीरें छा गईं हैं। सुहेली के जलस्तर में लगातार बढ़ाव देखा जा रहा है जिससे यह भी संभावनाएं पैदा हो गईं हैं कि बाढ़ का पानी गांवों में घुस सकता है। इससे ग्रामीण खौफजदा हैं।
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