महेवागंज। शारदा नदी गांव ग्रंट 12 और मंझरी के बाशिंदों के लिए अभिशाप बन गई है। खेत खलिहान लील चुकी शारदा नदी अब एक-एक कर लोगों के सिर से छत भी छीन रही है। गांव का वजूद मिटता देख ग्रामीण आशंकित हैं। वह मां शारदा को शांत करने के लिए पूजा पाठ कर रहे हैैं।
ग्रंट 12 गांव में 60 घर हैं। आबादी 300 के करीब है। कच्चे पक्के अब तक डेढ़ दर्जन घर नदी में समा चुके हैं, जबकि 40 घर निशाने पर हैं। गांव का वजूद मिटता देख ग्रामीण आशंकित है। मजबूरन लोगों का गांव से पलायन जारी है। मिलपुरवा, शंकरपुरवा और धोबियाना गांव किनारे करीब 60 लोग विस्थापितों की जिंदगी जी रहे हैं। प्रशासन से मदद न मिलने का आरोप लगा पीड़ित सिस्टम को कोस रहे हैं। वहीं मां शारदा नदी से ग्रामीण शांत होने की विनती कर रहे है। कटान करती नदी आगे बढ़ रही है। इससे मंझरी, अहिराना बेचन पुरवा के लोगों में भी बेचैनी बढ़ गई है। करीब 1500 की आबादी समेटे गांव पर खतरे के बादल मंडराते देख लोग चिंतित हैं। करदैहा मानपुर के ग्राम प्रधान ने बताया कि प्रशासन की ओर से कटान रोकने के अभी तक कोई इंतजाम नही किए गए हैं।
गांव का अस्तित्व खतरे में है। शारदा नदी लगातार हमारे घरों को लील रही है। तिनका तिनका जोड़ कर घर बनाया था। शुक्रवार को नदी में समा गया। हमारे पास पलायन के सिवा दूसरा कोई रास्ता नहीं रहा। - राजकुमार निवासी, ग्रंट-12
शासन प्रशासन से कोई खास मदद नहीं मिली है। पिछले दिनों बाढ़ के समय एक दिन राशन किट बांटी गई थीं। दोबारा कोई झांकने तक नहीं आया। भूख प्यास से मवेशी भी परेशान हैं। - संतोष यादव, मंझरी
खेत पहले ही कट गए। अब ठिकाना भी जा रहा है। कटान रोकने के कोई इंतजाम न होने से गांव वाले खामियाजा भुगत रहे हैं। विधायक और डीएम से सिर्फ आश्वासन ही मिला है। सभी मां शारदा से शांत होने की मनौती कर रहे हैं। - मंगल कुमार, ग्रंट 12