एक ओर अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त है तो दूसरी और मिलपुरवा स्थित शारदा सहायक बंधे से बालू खनन ने तेजी पकड़ ली है। तर्क है कि बालू बंधे की मरम्मत को निकाली जा रही है। खास बात यह कि मरम्मत कार्य में जुटे लोग बंधे से ही बालू-मिट्टी खींचकर उसे मजबूती देने का प्रयास कर रहे हैं। इससे बंधे के निचले हिस्से के कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
फूलबेहड़ के मिलपुरवा स्थित शारदा एफलेक्स की मरम्मत का कार्य चल रहा है। वर्षा सिर पर आते ही सिंचाई विभाग को बंधे की फिक्र सताने लगी है। इसके सुदृढ़ीकरण का काम चालू करा दिया गया है। ग्रामीणों की माने तो कार्यदायी संस्था के कर्मी बंधे के अंदर की ही बालू खींचकर इकट्ठा कर रहे हैं। ट्रैक्टर से गहराई तक करहा लगाया जा रहा है। इससे ग्रामीण बंधे के कमजोर पड़ने की आशंका जता रहे हैं। मरम्मत कार्य में लगे मजदूरों का कहना है कि उन्हें अंदर से ही बालू इकट्ठा करने के लिए कहा गया है। जो बाढ़ के समय बोरियों मे भरकर बंधे को दुरुस्त करने के काम में डाली जाएगी। वहीं सूत्र बताते हैं कि बंधे से इकट्ठा की गई बालू ट्रैक्टर में भरकर चोरी-छिपे बेची भी जा रही है। इससे पर्यावरण के साथ ही राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।
कई बार फट चुका है बंधा
फूलबेहड़ के मिलपुरवा स्थित शारदा सहायक बंधा बाढ़ के समय कमजोर होकर कई बार फट चुका है। गौरा, श्रीनगर और खगईपुरवा गांव के बीच यह हादसे हुए है। बाढ़ से बंधे के अंदर बसे गोपालपुरवा, खगईपुरवा, चकलुआ, रघुनाथपुरवा, जंगलनं 10-11 समेत दर्जनों गांव जलमगभन हो जाते हैं। वहीं बंधा फटने से शारदा का पानी श्रीनगर, गौरा, फूलबेहड़, तेंदुआ आदि गांवों में पानी तबाही मचाता है।
प्रभारी खनन/एडीएम एसपी सिंह ने बताया कि बंधे में बालू खनन मेरी जानकारी में नहीं है। फिर भी मामले को संज्ञान में लेकर जांच कराई जाएगी। बालू खनन होने की पुष्टि हुई तो कार्रवाई की जाएगी।
.....खनन के लिए जिम्मेदार कौन?
पलियाकलां। बालू खनन हो या फिर मिट्टी का खनन। ऐसे में यही सवाल सबकी जुबां पर तैर जाता है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है? माफिया या फिर महकमे जिनके ऊपर इसको रोकने का जिम्मा है। फिलहाल हालात तो यही बताते हैं कि खामी सिर्फ सिस्टम की है वर्ना यह अवैध खनन कब का बंद हो चुका होता। अभी एक महीने पहले की ही बात है। मटहिया गांव के पास रात में शारदा नदी से हो रहे अवैध बालू खनन में कई ट्रॉलियां लगी हुईं थीं जिनको पुलिस ने पकड़ा भी लेकिन कैसे छूट गईं इसका पता ही नहीं चल सका। इसके बाद भी यहां से रात में अवैध बालू खनन जारी है और रोकने वाला कोई नहीं। बात शहर की जाए तो यहां भी तकरीबन यही हालात हैं रात के अंधेरे में बालू भरी ट्रॉलियां आती हैं और अपने तय शुदा स्थानों पर बालू डालकर चली जाती हैं। फिर माफिया इन्हें महंगे दामों में बेच देते हैं। क्या इस खनन और स्टोरेज की जानकारी जिम्मेदारों को नहीं है? फिलहाल कोर्ट का आदेश आने के बाद भी जिम्मेदारों ने चुप्पी साध रखी है और यह कारोबार धड़ल्ले से जारी है।