पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। पहाड़ों पर हो रही बारिश से शारदा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। जिसके चलते आसपास निचले इलाकों के ग्रामीणों में दहशत है। नदी के पानी ने श्रीनगर गांव के साथ ही कई गांवों की ओर रुख मोड़ लिया है। हालांकि अभी बाढ़ का खतरा तो नहीं है लेकिन नदी का लगातार बढ़ता जलस्तर ग्रामीणों के चेहरों पर शिकन ला रहा है और वह बाढ़ का खतरा महसूस करने लगे हैं। बोझवा गांव की पुलिया भी डूब गई है।
बारिश के मौसम में तराई के लोगों को हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही निचले गांवों के इलाकों में जलभराव हो जाता है और बाढ़ आ जाती है। अभी हालांकि बाढ़ जैसे हालात नहीं है लेकिन नदी का जलस्तर बीते दो दिनों से लगातार बढ़ रहा है। जल आयोग की माने तो पहाड़ों पर होने वाली बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ा है। श्रीनगर गांव के किनारे कई साल पूर्व बांध बनाया गया था जिसके किनारे पर अब नदी का पानी चलने लगा है। वहीं आधा दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों में अफरी-तफरी मची हुई है।
इन गांवों में नदी हर साल मचाती है तबाही
अगर शारदा नदी की बाढ़ की बात करें तो नदी हर साल श्रीनगर, आजादनगर, बर्बादनगर, बोझवा, मटैहिया, दौलतापुर, पिपरिया भूड़, ढकिया खुर्द, देशराज टांडा, छंगा टांडा आदि गांवों में जमकर तबाही मचाती है। यहां हर साल बाढ़ के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानियां होती हैं और वह अपने ही आशियाने अपने हाथों से तोड़ने को विवश होते हैं। हालांकि बाढ़ न आने की स्थिति में वह फिर से वहीं रहने लगते हैं।
बोझवा ठोकर नंबर एक से जान जोखिम में डालकर निकलते हैं ग्रामीण
बोझवा गांव में रेलवे लाइन किनारे ठोकर नंबर एक के पास गांव के लोगों की कृषि भूमि है। जिसमें उनका गन्ना आदि खड़ा है। खेतों से चारा लाने भी ग्रामीण बोझवा की पुलिया से होकर जाते हैं लेकिन नदी के बढ़े जलस्तर से इस पुलिया पर चार फुट तक पानी भरा हुआ है। जिससे जान जोखिम में डालकर ग्रामीण उसपार जाकर चारा लाने को विवश हैं। नावों का भी ग्रामीण सहारा लेते हैं ताकि पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था हो सके।
इमलिया फार्म के रास्ते पर भी भरा पानी
शारदा नदी का पानी इमलिया फार्म जाने वाले रास्ते पर भी भर गया है। इस रोड पर पड़ने वाले रपटा पुल पर पानी चल रहा है। जिसके बीच से ग्रामीणों को गुजरना पड़ रहा है।