गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी)। शास्त्रों में शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी भ्रमण के लिए पृथ्वी पर आती हैं।
ज्योतिषाचार्य पं रामदेव मिश्र ने बताया कि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। यूं तो साल में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं लेकिन अश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को बहुत खास माना जाता है। इसे शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। शरद पूर्णिमा से ही शरद ऋतु का आगमन होता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी से रात्रि में भी चारों और उजियारा रहता है। सनातन धर्म की परंपरा में आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाने की धार्मिक और पौराणिक परंपरा है। शरद पूर्णिमा के पर्व को कौमुदी उत्सव, कुमार उत्सव, शरदोत्सव, रास पूर्णिमा, कोजागिरी पूर्णिमा एवं कमला पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा को देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करने आती हैं और घर-घर जाकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देती हैं। शरद पूर्णिमा को माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। शरद पूर्णिमा पर रात भर जागकर माता की स्तुति की जाती है। शरद पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं जिसमें देवी लक्ष्मी का प्रिय भोग और वस्तुएं अर्पित करते हैं। शरद पूर्णिमा पर देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कमल गट्टे की माला से इस मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र- ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम:।
--------------
खीर रखने का महत्व
शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर चांद की रोशनी में रखी जाती है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चांद की किरणें अमृत बरसाती हैं। उस खीर में अमृत का अंश मिलने से व्यक्ति को आर्थिक संपन्नता, सुख-समृद्धि और धन लाभ मिलता है। इसलिए अमृत समान खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए।
-------------------------
शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त
30 अक्तूबर की शाम 05:22 मिनट से 31 अक्तूबर की रात 07:31 मिनट तक। अत: 31 अक्तूबर को 5 बजकर 33 मिनट पर सूर्यास्त हो रहा है सूर्यास्त होने के बाद एक घंटा 58 मिनट रात्रि में पूर्णिमा मिल रही हैं अत: 31 अक्तूबर को सूर्योदय के समय एवं सूर्यास्त के बाद तक पूर्णिमा होने के कारण 31 अक्तूबर को ही व्रत व पूजन उत्सव शुभ होना चाहिए। संवाद