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जलेबी में सिंथेटिक कलर मिलने पर विक्रेता को एक वर्ष की कैद

Wed, 03 Jan 2018 12:58 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
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कोर्ट - फोटो : amar ujala
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम द्वारा करीब 22 साल पहले जलेबी के नमूने की जांच रिपोर्ट में सिंथेटिक कलर की पुष्टि होने के मामले में मोहम्मदी के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने विक्रेता (दुकानदार) को एक साल के कैद की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी विक्रेता पर तीन हजार रुपये जुर्माना भी डाला है, जिसे अदा न करने पर विक्रेता को 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

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अभिहित अधिकारी डॉ. अमर सिंह वर्मा ने बताया है कि तत्कालीन खाद्य निरीक्षक ने 26 दिसंबर 1995 को सुबह 10.30 बजे मोहम्मदी (गोकन रोड) स्थित रामगोपाल निवासी गांव सहिजना की दुकान से रंगीन जलेबी का नमूना लिया था, जिसे जांच के लिए लखनऊ स्थित पब्लिक एनॉलिस्ट लैब भेजा गया था। लैब जांच में रंगीन जलेबी में सिंथेटिक कलर (अखाद्य) की पुष्टि हुई और जलेबी को पकाने के लिए वनस्पति न होकर अन्य खाद्य तेल पाया गया। इस पर तत्कालीन खाद्य निरीक्षक ने 26 जून 1996 को न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहम्मदी के यहां विक्रेता रामगोपाल के खिलाफ मुकदमा दायर किया। करीब 21 साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद इस मामले में मोहम्मदी के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रमोद सिंह यादव ने (20 दिसंबर 2017) दोषी पाए गए जलेबी विक्रेता रामगोपाल के खिलाफ 16 पीएफए एक्ट के तहत एक वर्ष कारावास की सजा का फैसला सुनाते हुए तीन हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने दोषी विक्रेता को गिरफ्तार कर जिला कारागार भेजने के आदेश पुलिस को दिए हैं। साथ ही जुर्माने की रकम अदा न करने की दशा में 15 दिन का अतिरिक्त कारावास सुनाया है।
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न्यायालय के आदेश की प्रति अभी प्राप्त नहीं हुई है। उसके मिलते ही दोषी की गिरफ्तारी कर चालान भेजा जाएगा।
- डीके सिंह, प्रभारी कोतवाल, मोहम्मदी

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