ब्लाक की ग्राम पंचायत जटपुरा के मजरा ढाका और हरदुआ में बरौछा नाले के दोनों ओर की कई हेक्टेयर जमीन सीपेज के कारण अनुपयोगी हो चुकी है। किसान इस जमीन में धान के अलावा कोई दूसरी फसल नहीं उगा पा रहे हैं। लगातार सीपेज की नमी रहने के चलते इस भूमि पर फसल तो होती नहीं, अलबत्ता स्थानीय भाषा में गांदी कही जाने वाली लंबी-लंबी घास जरूर लहलहा रही है।
बरौछा नाला जंगल से निकलकर उल्ल नदी में गिरता है। इस नाले में पूरे साल खीरी ब्रांच नहर की सीपेज का पानी भरा रहता है। ड्रेन के दोनाें ओर ग्राम ढाका और हरदुआ के सैकड़ाें भूमिधर किसानोें की करीब 135 एकड़ (54.6326)जमीन है। बताते हैं कि पहले यह नाला गहरा था और पूरे साल पानी भरा रहने के बावजूद पानी बाहर नहीं आता था। धीरे-धीरे इसमें सिल्ट जाम होने के करण गहराई कम होती गई। इससे दोनों तरफ सीपेज की समस्या बढ़ गई। अब हालत यह है कि यहां धान के अलावा कोई दूसरी फसल उगती ही नहीं है।
भूस्वामी होने के बावजूद भूमिहीन हैं किसान
ग्राम ढाका और हरदुआ के किसानों के पास इसके अलावा कोई दूसरी जमीन भी नहीं हैं। इसके चलते वह भूस्वामी होते हुए भी भूमिहीन बन गए हैं। वह अब इस जमीन को निरर्थक मानने लगे है।
बैंक भी नहीं देती इस भूमि पर कर्ज
किसान हरभजन सिंह, कारज सिंह, हैपी सिंह, मोहम्मद जाबिर, जगतार सिंह, साधू सिंह, रामशंकर, रामकिशुन, रामस्वरूप आदि ने बताया कि बैंकभी इस जमीन पर कर्ज नहीं देतीं। खरीददार भी दुर्दशा देखकर लौट जाते हैं।
नाले के आसपास रहते हैं बाघ और हिरन
बरौछा नाले में पूरे साल पानी भरा रहने और लंबी घास खड़ी रहने से यहां बारहसिंघा, हिरन, चीतल, पाढ़ा के साथ ही बाघ, बाघिन भी अपना बसेरा बनाते हैं। यह उनकी पसंदीदा जगह बन गई है। चार साल पहले ग्राम ढाका निवासी रामचंद्र के 10 वर्षीय पुत्र रिंकू को एक बाघ ने हमला कर घायल कर दिया था। बाघों की मौजूदगी से किसान यह घास साफ करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।