शर्तें माने जाने के बाद परिजन ने शव का कराया पोस्टमॉर्टम
वन विभाग की कांबिंग जारी, बाघ को कैद करने के लिए एक और पिंजरा मंगवाया
तिकुनियां। मजरा पूरब के जंगल में गांव निवासी बुजुर्ग राममूर्ति की बाघ के हमले से मौत के बाद ग्रामीणों के हंगामे के आगे झुके वन विभाग ने गांव वालों की सारी मांगें मान लीं, जिसके बाद परिजन ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए वन विभाग को सौंप दिया। रविवार को उसका अंतिम संस्कार कर दिया। उधर, रविवार को वन विभाग की टीम ने कांबिंग जारी रखी और बाघ को कैद करने के लिए एक और पिंजरा मंगवाया है।
शनिवार को बुजुर्ग राममूर्ति को बाघ ने हमलाकर मार डाला था, जिसके बाद नाराज परिजन ने हंगामा शुरू कर दिया था। परिजन और ग्रामीणों का कहना था कि जब तक बाघ से सुरक्षा का पक्का बंदोबस्त व मुआवजा राशि दस लाख रुपया नहीं मिल जाती तब तक वह अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। ग्रामीणों के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा भी उतर आया। बाद में एसडीएम श्रद्धा सिंह, जिला वन अधिकारी सुंदरेश कुमार, एसडीओ जेपी श्रीवास्तव व रेंजर विमलेश कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों से वार्ता के बाद किसान संयुक्त मोर्चा ने बताया कि मांगें मान ली गई हैं। इसके बाद रविवार को राममूर्ति का अंतिम संस्कार कर दिया गया, जबकि रेंजर विमलेश कुमार का कहना है कि मृतक के बच्चों को दुधवा नेशनल फंड से सहायता राशि दी जाएगी।
यह मानी गईं हैं शर्तें
संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े गुरमीत सिंह रंधावा ने बताया कि जिला वन अधिकारी से 10 लाख रुपये व दो बेटियों की शादी के अनुदान के लिए कहा गया है। एक बेटी को कैजुअल नौकरी देने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा पांच लाख की सहायता राशि जो मृतक के परिजन को मिलती है, वह दी जाएगी। उन्होंने बताया कि वन अधिकारियों ने बाघ से सुरक्षा के लिये इलेक्ट्रिक तार लगाने व शासन से आदेश लेकर आगे की कार्रवाई करने की बात कही है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष के दौरान होने वाली मौत पर आपादा मोचक निधि में शासन की ओर से मृतक आश्रित परिवार को पांच लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके अलावा दुधवा टाइगर कंजरवेशन फांउडेशन की ओर से तात्कालिक सहायता के रूप में दस हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। - संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व
नजर आए ताजे पगमार्क, नहीं दिखी बाघिन
महेवागंज। शनिवार शाम कस्बे के समीप लिलौटीनाथ मंदिर के पश्चिम पिपरा मरोड़ा जाने वाले मार्ग पर कुछ किसानों को बाघिन दिखाई दी। सूचना पर वन विभाग की टीम रात में ही मौके पर पहुंची। कांबिंग के दौरान बाघिन नजर नहीं आई पर वन कर्मियों को उसके ताजे पग मार्क जरूर दिखे। यहां बता दें कि बाघिन के शोर से लिलौटी नाथ, पिपरा मरोड़ा, फूलबेहड़, महेवा, अन्देशनगर, बल्हवापुर, जमुनिया आदि गांवों के लोगों में भय का माहौल है। संवाद