बाढ़ राहत घोटाले की जांच के दूसरे दिन शनिवार को एसडीएम पीके सिंह ने कई
पहलुओं पर जांच करते हुए ग्राम प्रधानों को तलब किया। साथ ही स्टेट बैंक के
मैनेजर को फर्जी खाता धारकों की पहचान करने वाले लोगों के खिलाफ रिपोर्ट
दर्ज करने के आदेश दिए। इस मामले से जुड़े कुछ दलाल गांव छोड़कर फरार हो गए
हैं। एसडीएम ने उन्हें शनिवार को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था।
एसडीएम
पीके सिंह के अनुसार उन्होंने लालपुर के ग्राम प्रधान चेतराम यादव और
निघासन के प्रधान भुवनेश्वर प्रसाद शाक्य को तलब किया। ग्राम प्रधानों ने
निवास प्रमाणपत्र पर अपने हस्ताक्षर और मुहर होने की बात को सिरे से खारिज
कर दिया। उधर फोटो पहचानपत्र पर पड़े नंबर का मिलान करने वे भी फर्जी
निकले। उन वोटर कार्ड के मूल नंबर में मुर्गहा और चौधरी पुरवा के
व्यक्तियों के नाम के पहचान पत्र पहले से ही दर्ज थे।
एसडीएम ने बताया
कि इन फर्जी खाताधारकों की पहचान शुक्ल प्रसाद निवासी बुद्धापुरवा और
बस्तीपुरवा निवासी जीतेंद्र कुमार ने की है। इन लोगों को बयान देने के लिए
बुलाया गया था, लेकिन यह लोग फरार हैं। उन्होंने बताया कि जालसाजों की
धरपकड़ शुरू कर दी गई है। बैंक प्रबंधक से इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को
कहा गया है।
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घोटाले में लेखपालों की भूमिका अहम्
एसडीएम ने
बताया कि बाढ़ राहत घोटाले में लेखपालों की भूमिका को नजरंदाज नहीं किया जा
सकता। तत्कालीन हल्का लेखपाल छत्रपाल यादव ने यह सारी बाढ़ राहत चेक
लाभार्थियों को देने के बजाय दलालों के हवाले कर दीं। लेखपालों की भूमिका
को भी जांच के दायरे में रखा गया है। दोषी लेखपालों पर कार्रवाई होगी।
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बैंक शाखाओं की लापरवाही उजागर
बाढ़
राहत घोटाले की जांच के दौरान बैंक शाखाओं की लापरवाही भी उजागर हुई है।
अधिकतर उजागर मामलाें में पीड़ित निघासन के मजरा मोहनलालपुरवा के हैं इनके
सारे खाते लालपुर गांव के नाम से जारी फर्जी पहचानपत्रों के आधार पर खोले
गए हैं।
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जांच में लेखपालों, बैंक शाखाओं और कुछ दलालों के नाम
उजागर हुए है। फर्जी आईडी बनाने वालों को चिह्नित करना बाकी है। बैंक मैनजर
को जालसाजों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए गए है। दुबहा में
एक लेखपाल के बेटे और कई अन्य लोगों के नाम भी फर्जी आईडी बनाने के मामले
में सामने आए है। मामले की जांच के बाद इन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
-पीके सिंह, एसडीएम, निघासन