तहसील अभिलेख में किसानों को मृत दिखाकर हुआ खेल
राजस्व निरीक्षक लेखपाल ने दूसरे के नाम दर्ज की कृषि भूमि
डीएम, एसडीएम से लगाई गुहार लेकिन नहीं हुई कोई सुनवाई
वे चीख चीखकर कह रहे हैं कि मैं जिंदा हूं। खुद के जिंदा होने का कागजी सबूत भी लेकर डीएम को प्रार्थनापत्र दिया, एसडीएम से मिले, तहसीलदार से गुहार लगाई, यहां तक कि खुद को मुर्दा दर्शाने पर कोतवाल को प्रार्थनापत्र देकर रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की है लेकिन सुनवाई नहीं हुई। खसरा खतौनी में ये किसान अभी भी मृत दर्शाए जा रहे हैं और तहसील के राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ने अभिलेखों में जमीन दूसरे के नाम दर्ज कर दी है।
ग्राम कैमहरा पोस्ट वेलहरी निवासी सर्वेश कुमार बाजपेयी ने बताया कि उनकी कृषि भूमि गाटा संख्या 326 रकबा 0-3150 गाटा संख्या 318 रकबा 0-3200 है। जिस पर वह खेती करते आ रहे हैं। 28 जून 2011 को क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ने खतौनी में मृतक घोषित कर पक 11 ख के तहत उनकी कृषि भूमि गांव निवासी मृतक सर्वेश कुमार और श्रीमती देवी के नाबालिग पुत्र अदिरल के नाम दर्ज कर दी। इसका पता उन्हें तहसील से खतौनी की नकल लेने के बाद लगा।
वहीं बेलहरी ग्राम और कैमहरा ग्राम में पैतृक कृषि भूमि पर खेती करने वाली जिला शाहजहांपुर के ग्राम रजमना पोस्ट मलिका निवासी वृद्धा मनोरमा देवी ने बताया कि वह अपने माता पिता की इकलौती संतान हैं। उनका विवाह रजमना में रामनरेश शुक्ला के साथ हुआ था। पिता माता के स्वर्गवास के बाद माता परागो के नाम ग्राम बेलहरी में दर्ज गाटा संख्या 190रकबा 0-2020 और ग्राम कैमहरा में गाटा संख्या 92 रकबा 0-0610 उनके नाम तहसील अभिलेख में इंद्राज हुई थी। दोनों खेतों पर वह काबिज होकर खेती कर रही हैं। चार जुलाई 2014 को क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ने पक11ख के तहत तहसील अभिलेख में उन्हें मृतक घोषित कर उनके नाम दर्ज कृषि भूमि बनवारीलाल, धर्मसिंह ने नाम दर्ज कर दी।
अपने को मृतक घोषित किए जाने के बाद से ही दोनों पीड़ितों ने डीएम, एसडीएम और कोतवाल को प्रार्थनापत्र देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। किंतु मुकदमा दर्ज नहीं हो सका है।
न रिश्तेदार न जाति के फिर भी कर दी विरासत
गोला गोकर्णनाथ। पीड़ितों ने बताया कि उन लोगों के जीवित होते हुए मृतक दिखलाकर जिन लोगों के नाम तहसील कर्मियों ने वरासत दर्ज की है वह उनके न तो परिवार के हैं न कोई रिश्तेदार। वह उनकी जाति के भी नहीं हैं। फिर भी उनके नाम विरासत दर्ज कर दी गई है।
तहरीर मिली है, जांच की जा रही है, जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
- एसएन द्विवेदी, कोतवाल गोला-खीरी