शहर की बदहाल बिजली व्यवस्था की तस्वीर बदलने के लिए लागू की गई एआरपीडीआरपी योजना के नाम पर शहरवासियों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो कार्यदायी संस्था के पास न तो पर्याप्त संख्या में ट्रांसफार्मर हैं और न ही एबीसी कंडक्टर। इसकी वजह से 53 किलोमीटर तक पुरानी जर्जर लाइनें नहीं बदली जा पा रही हैं और न ही शहर में ओवरलोडिंग की समस्या को दूर करने के लिए 107 ट्रांसफार्मर बदले जा रहे हैं। इस कारण लोगों की दिक्कतें बढ़ रही हैं।
वर्षा के दिनों में जर्जर बिजली लाइनों के टूटने और ओवरलोडिंग से ट्रांसफार्मरों के फुंकने के कारण लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। वर्ष 2014 में एआरडीआरपी योजना को इसलिए लागू किया गया था कि जर्जर बिजली लाइनों को बदला जाएगा और आबादी के हिसाब से ट्रांसफार्मरों को लगाया जाएगा ताकि ओवरलोडिंग, ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की समस्या से निजात मिल सके। आंकड़ों के मुताबिक शहर में 1600 बिजली के पोल, 214 ट्रांसफार्मर और 75 किलोमीटर तक जर्जर बिजली लाइन बदली जानी है। कार्यदायी संस्था के अब तक के कार्य पर नजर डालें तो सिर्फ 1100 पोल लगे है, 22 किलोमीटर बंच कंडक्टर बिछाया गया है और सिर्फ 97 ट्रांसफार्मर लग पाए हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक कार्यदायी संस्था का कार्य बेहद धीमा है। इस कारण शहर की जर्जर लाइनें अब तक नहीं बदली गई है। इन लाइनों के बार-बार टूटने से और ट्रांसफार्मरों के फुंकने से मोहल्लों की बिजली सप्लाई ठप हो रही है। खास बात यह है कि कार्य पूरा न होने की दशा में एक बार योजना के पूर्ण होने का समय भी बढ़ाया जा चुका है लेकिन तब भी कार्य की गति तेज नहीं हो रही है।
जेई नई बस्ती मनोज पुष्कर ने बताया कि शहर में एआरपीडीआरपी योजना का काम वर्ष 2016 तक पूरा होना है। मौजूदा समय में कार्यदायी संस्था के पास ट्रांसफार्मर और केबल की कमी है। इस कारण थोड़ी दिक्कत आ रही है। अभी उन मोहल्लों में ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जहां ओवरलोडिंग की दिक्कत ज्यादा है।