गोला गोकर्णनाथ। सावन की तैयारियों को लेकर तहसील सभागार में हुई बैठक में रणनीति तैयार की गई।अधिमास सावन में पिछले वर्षों से अधिक श्रद्धालु उमड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। तय किया गया कि रविवार और सोमवार को रोडवेज बसों का संचालन शहर के बाहर से किया जाएगा।
तहसील सभागार में एसडीएम रत्नाकर मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में पूर्व में सावन मेला करा चुके तत्कालीन एसडीएम अनुराग सिंह, धौरहरा प्रभारी निरीक्षक विवेक कुमार उपाध्याय के सुझाव अनुभव साझा किए गए। बैठक में यातायात, बिजली, पेयजल, पार्किंग, श्रद्धालुओं के ठहरने का स्थान, भीड़ को नियंत्रित करने के विकल्प, सुरक्षा, शौचालय, साफ सफाई आदि व्यवस्थाओं की रणनीति तय की गई।
एएसपी नैपाल सिंह ने सुरक्षा के संबंध में रूट प्लान, बैरिकेडिंग को लेकर अधीनस्थों को निर्देशित किया। बैठक के बाद अधिकारियों और नगर पालिकाध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू ने गोकर्णतीर्थ, पौराणिक शिव मंदिर और परिक्षेत्र के मार्गों का निरीक्षण किया। पालिका अध्यक्ष ने कहा कि सावन माह में श्रद्धालुओं के लिए शहर के सभी शौचालय और रैन बसेरा निशुल्क रहेंगे।
इस मौके पर तहसीलदार विनोद कुमार गुप्ता, सीओ राजेंद्र प्रसाद, ईओ प्रदीप नारायण दीक्षित, सफाई एवं खाद्य निरीक्षक संदीप कुमार वर्मा, मोहित गिरि, पालिका सदस्य राजेश अवस्थी आदि मौजूद रहे।
सीसीटीवी और ड्रोन से होगी सावन मेले की निगरानी
एएसपी नैपाल सिंह ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था ने अग्निशमन के साथ पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा। एलआईयू के साथ सिविल ड्रेस में पुलिस कर्मियों की तैनाती रहेगी। शिव मंदिर गोकर्ण तीर्थ सहित मेले की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन कैमरे से की जाएगी। रविवार की शाम से सोमवार की शाम तक ई रिक्शा पर रहेगी।
सावन माह की प्रबंध रूपरेखा
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मेला कार्यालय बनाकर एनाउंसमेंट किया जाएगा।
मंदिर के प्रवेश द्वार के बाहर एलईडी पर पौराणिक शिव मन्दिर के गर्भ गृह का लाइव प्रसारण।
मंदिर परिसर के आस पास बेरीकेटिंग, बैरियर।
नगर के प्रमुख मार्गों पर स्वागत द्वार, बाहर से आने वाले वाहनों की पार्किंग व्यवस्था।
रविवार और सोमवार को रोडवेज बसों की नगर के बाहर से संचालन।
नीलकण्ठ मैदान में नि:शुल्क शौचायल, नि:शुल्क रैन बसेरा, मोबाइल ट्वायलेट, पानी टैंकर।
दर्शनार्थी श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क गंगाजल।
मेला कैंप कार्यालय में मेडिकल कैंप की व्यवस्था, खोया पाया की व्यवस्था।