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लेखपालों को बचाने का आरोप

Wed, 08 Apr 2015 06:46 PM IST
निघासन
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निघासन के बहुचर्चित बाढ़ राहत राशि घोटाले में जांच अधिकारी एसडीएम पर लेखपालों को बचाने का आरोप लग रहा है। एसडीएम पीके सिंह ने अपनी जांच केवल फर्जी खाता खोलकर चेक भुनाने वाले दलालों और लापरवाही पूर्वक फर्जी खाता खोलने वाले बैंकों पर केंद्र्रित रखी है। दलालों के हाथ चेक बेचने वाले लेखपालों के खिलाफ अब तक एफआईआर तो दूर विभागीय कार्रवाई तक नहीं हो सकी है।
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बाढ़ राहत घोटाले के शिकार हुए लोगों का आरोप है कि एसडीएम आरोपी लेखपालों को बचाने के प्रयास में है। लालपुर ग्राम पंचायत के दर्जनों पीड़ितों ने कार्रवाई न होने पर गहरा रोष जताया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से लेखपालों को बचाने का प्रयास चल रहा है उससे स्पष्ट होता है कि लेखपाल से अधिकारियों तक ने एक संगठित रैकेट के रूप में घोटाले में अपनी भूमिका निभाई है। चेतावनी दी है कि यदि दोषियों को बचाने की कोशिश हुई तो इसकी शिकायत डीएम से सीएम तक की जाएगी।
वर्ष 2013-14 में आई बाढ़ के बाद नुकसान का सर्वे कर  लालपुर ग्राम पंचायत में ही 1700 से अधिक बाढ़ पीड़ितों की राहत चेक बनीं थी। इनमें कुछ एकाउंटपेयी तो कुछ बियरर चेक थीं। इनमें से कई बाढ़ पीड़ितों तक चेकनहीं पहुंचीं। संबंधित लेखपालों ने कुछ लोगों को तो चेक दे दिए बाकी चेक दलालों के हाथों बेच दीं। जिन्होंने फर्जी खाते खुलवाकर पैसे निकाल लिए। उधर बैंक में फर्जी आईडी पर खाता खोलने वाले बैंक मैनेजर के खिलाफ भी कोई भी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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आरोप है कि एसडीएम पीके सिंह ने जालसाजों के खिलाफ रिपोर्ट तो दर्ज करा दी, लेकिन लेखपालों पर कोई कार्रवाई नहीं की। बियरर और एकाउंट  पेई चेक दलालों के पास कैसे पहुंचे इस बात का जवाब एसडीएम के पास भी नहीं है। उधर फर्जी आइडी बनाने, बैंक में फर्जी तरीके से खाता खोलने वाले शाखा प्रबंधक के खिलाफ भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
एडीएम हरिकेश चौरसिया ने बताया कि बाढ़ राहत राशि घोटाले की जांच एसडीएम निघासन को सौंपी गई है। उनसे घोटाले के सभी पहलुओं पर बारीकी से जांच करने को कहा गया है। जांच में दोषी मिलने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मामला संगीन है इसलिए कार्रवाई भी कड़ी होगी।
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