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भगवा आंधी ने बिगाड़े समीकरण

Sat, 11 Mar 2017 10:05 PM IST
लखीमपुर, ब्यूरो
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वोटरों के बदले रुझान को भांप नहीं पाए उम्मीदवार 
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 जिले में विधानसभा चुनाव के परिणाम काफी चौंकाने वाले रहे। यह पहला मौका है जब जिले की सभी सीटों में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार जीतने में कामयाब रहे हैं। जिले में बदलाव की ललक के चलते मतदाताओं ने विकल्प के रूप में भाजपा को चुना। एक बार यहां 2014 के लोकसभा चुनाव जैसी लहर दिखाई दी जो चुनाव के पहले इतना स्पष्ट नहीं थी, लेकिन चुनाव के दिन यह यह लहर आंधी में बदल गई। मुस्लिम वोटों के बटवारे ने भाजपा की जीत आसान कर दी।
विधानसभा क्षेत्र पलिया के भाजपा प्रत्याशी पिछला चुनाव बसपा के टिकट पर जीते थे। इस बार भी उन्होंने बसपा के वोटों में सेंध लगाई। कांग्रेस-सपा गठबंधन उम्मीदवार सैफ अली नकवी ने मुस्लिम वोटों के साथ दलित वोटों में भी सेंधमारी कर रोमी साहनी की जीत आसान कर दी। 
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विधानसभा क्षेत्र निघासन में बसपा का परंपरागत मौर्य बिरादरी इस बार भाजपा के साथ थी। भाजपा को अपने परंपरागत वोटों के साथ-साथ दलित और मार्य बिरादरी के वोटों का साथ मिला। यहां के मतदाता बदलाव भी चाहते थे। इससे सपा अपना गढ़ नहीं बचा पाई। 2014 के उपचुनाव में छिनी इस सीट पर भाजपा ने एक बार फिर अपना कब्जा जमा लिया है। 
विधानसभा क्षेत्र गोला क्षेत्र में भी बदलाव की बयार बह रही थी। ऐसे में भाजपा प्रत्याशी अरविंद गिरि ही एक मात्र विकल्प के रूप में सामने आए। वह इस क्षेत्र से पहले भी विधायक रह चुके हैं। उनके व्यापाक जनाधार, बदलाव की बयार और भाजपा के अंडर करंट ने उन्हें शानदार जीत दिलाने में मदद की।
विधानसभा क्षेत्र श्रीनगर में निवर्तमान विधायक रामसरन का टिकट काट कर मीरा बानो को सपा ने अपना उम्मीदवार बनाया था। पिछले दो बार से यहां सपा जीतती रही थी। इस बार मतदाताओं में बदलाव की मंशा और भाजपा के पक्ष में लहर ने भाजपा की मंजू त्यागी के सिर पर जीत का ताज सजा दिया। 
लखीमपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में सपा का किला ढह गया। इस सीट पर 1996 से लगातार सपा का कब्जा रहा है। इस बार भी सपा के सामने अपना किला बचाने की चुनौती थी लेकिन भाजपा के पक्ष में चल रही लहर बदलाव की मंशा से भाजपा के योगेश वर्मा चुनाव जीतने में कामयाब रहे। बसपा की यहां भी दुर्गति हुई है। 
धौरहरा विधानसभा क्षेत्र में अप्रत्याशित परिणाम सामने आए हैं। यहां शुरुआत से भाजपा उम्मीदवार को काफी कमजोर माना जा रहा था लेकिन ऐन चुनाव के पहले कुछ ऐसी हवा चली कि भाजपा के बाला प्रसाद अवस्थी मुकद्दर के सिकंदर बन गए। सपा दूसरे और बसपा तीसरे स्थान पर चली गई। हालांकि यहां जीत हार का अंतर अन्य विधानसभा क्षेत्रों से काफी कम रहा है। 
कस्ता विधानसभा क्षेत्र से पहला विधायक बनने का इतिहास रचने वाले सपा प्रत्याशी सुनील कुमार लाला अपने वर्चस्व को कायम नहीं रख पाए। इस सुरक्षित सीट पर सवर्ण वोटों के साथ साथ दलित वोटों का साथ भी भाजपा को मिला। पिछड़े वर्ग के वोट भी सुनील लाला नहीं सहेज सके इसके चलते उनकी हार हुई। 
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मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र में वोटों का ध्रु्वीकरण ने भाजपा को फायदा पहुंचाया। हालांकि यहां मुस्लिम वोटों का बटवारा बसपा और सपा के बीच हुआ है लेकिन अन्य वोटों का रुझान भाजपा की तरफ रहा। इससे भाजपा की जीत हुई। मुस्लिम वोटों के बटवारे से ही कांग्रेस दूसरे स्थान पर पहुंची। बसपा के दाउद अहमद को तीसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा है। 
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