लखीमपुर खीरी। शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश पाने वाले बच्चों के अभिभावकों के आय व निवास प्रमाणपत्र की जांच होगी। इस संबंध में निजी स्कूलों के संचालकों ने मांग की है। कहा है कि योजना के तहत नियमों को ताक पर रखकर चयन किया गया है। ज्यादातर गरीबों को इस योजना से बाहर रखा गया है, जबकि अमीरों के बच्चे लाभ उठा रहे हैं।
आर्थिक बोझ के चलते मध्यम वर्गीय लोग अपने बच्चों का निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं करा पा रहे थे। इसको देखते हुए साल 2010 में योजना लागू की गई थी। इसके तहत 25 प्रतिशत सीटों पर आरटीई के तहत प्रवेश देने का नियम है, लेकिन स्कूल प्रशासन और विभागीय सांठगांठ के चलते जरूरतमंदों को अब भी प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। रसूखदार और कोटेदार जैसे संपन्न परिवारों को पात्र करके योजना को पलीता लगाया जा रहा है।
बीते दिनों डीएम के आदेश पर बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने नौ स्कूलों को नोटिस जारी कर जल्द प्रवेश करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद संचालक डीएम के सामने अपना पक्ष रखने पहुंचे। डीएम के न मिलने पर एसडीएम से उन्होंने पूरी बात बताते हुए अभिभावकों के आय और निवास की जांच कराने का मुद्दा उठाया। फिलहाल अतिरिक्त एसडीएम ने डीएम से पूरा मामला बताकर जांच कराने का आश्वासन दिया है।
कोटेदार पात्र व प्राइवेट कर्मी का आवेदन अपात्र
हाल ही में एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है, जहां पर एक काेटेदार ने सांठगांठ करते हुए आवेदन को पात्र करा लिया। इतना ही नहीं उसे काॅन्वेंट स्कूल में सीट भी दिलवा दी। उक्त कोटेदार के बच्चे का जिस स्कूल में प्रवेश होना है, वह उसके वार्ड का भी नहीं बताया जा रहा है। दूसरा मामला एक प्राइवेट नौकरी करने वाले अभिभावक का था। अभिभावक का कहना था कि उसने दो बार आवेदन किया, लेकिन दोनों ही बार उसका आवेदन अपात्र कर दिया गया।
आरटीई की स्थिति
कुल निजी स्कूल- करीब 825
कुल सीटें-करीब 5387
पहले चरण में पात्र आवेदन-करीब 400
दूसरे चरण में पात्र आवेदन-345
तीसरे चरण में पात्र आवेदन-238
चौथे चरण में पात्र आवेदन- 168
निवास और आय प्रमाणपत्र कई बार फर्जी तरीके से बनाकर अमीर अभिभावक इस योजना का लाभ उठाने में लगे हैं। दोनों प्रमाणपत्रों की जांच कराई जाए तो इसका पर्दाफाश हो सकता है।
रेशू त्रिवेदी, पब्लिक स्कूल समन्वयक
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आय और निवास एसडीएम कार्यालय से जारी होते हैं। उसी के हिसाब से पात्रता देखी जाती है। इन दस्तावेजों के दौरान लेखपाल क्या रिपोर्ट लगाते हैं, यह नहीं पता। फिलहाल, प्रमाण-पत्रों की जांच कराई जाएगी।
प्रवीण कुमार तिवारी, बीएसए