शहर में लगातार हो रही बिजली कटौती के बीच अब यह लगभग तय हो गया है कि हाल-फिलहाल रोस्टरिंग के बदलने की उम्मीद कम है। शहरवासियों को पुरानी रोस्टरिंग से ही बिजली सप्लाई की जाएगी। बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए विभागीय अधिकारियों ने शहर के ओवरलोड फीडरों का लोड कम कर एक-दूसरे पर समायोजित करने का मन बनाया है। अधिशासी अभियंता रजनीकांत मिश्रा ने शहरी फीडरों के बिजली लोड की समीक्षा शुरू कर दी है। उनके मुताबिक गढ़ी उपकेंद्र से जुड़े फीडर नार्मल स्थिति में हैं, लेकिन नई बस्ती उपकेंद्र से जुड़े कई फीडरों पर उनकी क्षमता से अधिक लोड है। खासकर जेल फीडर का बिजली लोड नियंत्रित करने को लेकर कवायद शुरू कर दी गई है।
मौजूदा समय में शहर में दो चरणों में सुबह पांच बजे से लेकर 11 बजे तक और दोपहर तीन बजे से लेकर शाम छह बजे तक बिजली कटौती का शेड्यूल निर्धारित है लेकिन लोगों को इस शेड्यूल के अलावा भी कई घंटे बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। रात में ट्रिपिंग की वजह से ओवरलोड फीडरों पर बार-बार बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। वहीं सुबह के समय रोस्टरिंग के कारण बच्चों के स्कूल जाने, नहाने, धोने और खाना बनाने के लिए पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि पिछले कई महीनों से शहर की बिजली कटौती का एक ही रोस्टर चल रहा है। उमस भरी गर्मी में सुबह और शाम के वक्त होने वाली बिजली कटौती से लोग बेहाल हो चुके हैं। बिजली कटौती के बाबत अधिशासी अभियंता रजनीकांत मिश्रा ने बताया कि रोस्टरिंग का समय सिस्टम कंट्रोल को ही बदलना है। इस बाबत अभी कोई निर्देश नहीं आया है, लेकिन लोकल स्तर पर बिजली लाइनों में कम से कम फाल्ट आएं, इसके लिए फीडरों की बिजली नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि ट्रिपिंग की समस्या से छुटकारा मिल सके। इसके लिए उपकेंद्रों के फीडरों की समीक्षा की जा रही है।