बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। बरेली की बंद पड़ी रबर फैक्ट्री से बेहोश कर लाने के बाद दुधवा के जंगल में छोड़ी गई बाघिन शर्मीली एक ही जगह ठहर कर रह गई है। यही कारण है कि जंगल में लगाए गए पांच जोड़ी कैमरों में उसकी तस्वीर अब तक कैद नहीं हो सकी है।
करीब सवा साल तक बरेली की बंद पड़ी रबर फैक्ट्री में प्रवास करने वाली किशनपुर सेंक्चुरी की बाघिन ने वन विभाग को खूब छकाया था। उसकी लोकेशन पता लगाने के लिए रबर फैक्ट्री में कई जगह कैमरे भी लगाए गए थे, लेकिन बाघिन कैमरे के सामने से बहुत कम बार गुजरी। उसके इस शर्मीले स्वभाव को देखते हुए वनाधिकारियों ने बाघिन का नाम शर्मीली रखा था। अपने नाम के अनुसार ही दुधवा जंगल में भी शर्मीली कैमरे के सामने आने से बच रही है। हालांकि पेट्रोलिंग टीमों को जंगल में मौजूद बाघिन के पगचिन्ह लगाए गए कैमरों के किनारे लगातार मिल रहे है, लेकिन शर्मीली एक बार भी कैमरों के सामने नहीं आई। इसी वजह से पांच दिनों के अंदर अब तक उसकी एक भी तस्वीर कैमरे में ट्रैप नहीं हुई है। जंगल के अंदर जिस ठिकाने पर बाघिन विचरण कर रही है वहां के वॉटरहोल पर भी गश्ती टीमों को उसके पगचिह्न लगातार मिल रहे हैं।
वन संरक्षक/ प्रभारी उपनिदेशक दुधवा नेशनल पार्क मनोज सोनकर ने बताया कि बरेली की रबर फैक्ट्री से लाकर दुधवा के जंगल में छोड़ी गई बाघिन की अभी तक गतिविधियां पूरी तरह सामन्य हैं। वह अपने स्थायी निवास के लिए जगह तलाश रही है। वन कर्मियों की टीमें बाघिन की लोकेशन पर पूरी तरह नजर रखे हैं। जल्दी ही यह बाघिन नए परिवेश में घुल-मिल जाएगी।