धौरहरा। सरकारी जमीन पर धार्मिक स्थल बनाकर अतिक्रमण के करीब 15 मामलों में तहसीलदार न्यायालय के एकपक्षीय आदेश के बाद पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई हैं। तहसीलदार ने निर्धारित समय में आए पुनरीक्षण प्रार्थना पत्र स्वीकार कर सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी है। पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई स्थगित रहेगी।
इन मामलों में पक्षकार लंबे समय से सुनवाई के दौरान न्यायालय में अपना पक्ष रखने नहीं पहुंचे थे। सितंबर में तहसीलदार ने राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत करीब 15 मामलों में एकपक्षीय आदेश जारी कर अतिक्रमण हटाने और क्षतिपूर्ति वसूलने के निर्देश दिए थे। इसके बाद संबंधित पक्षकारों ने पुनरीक्षण दाखिल किया।
मस्जिद के निर्माण का मामला भी शामिल
धौरहरा नगर में करीब ढाई वर्ष पहले सरकारी जमीन पर मस्जिद निर्माण का मामला चर्चित रहा था। आरोप है कि सड़क के नाम दर्ज गाटा संख्या 1954 के 0.040 हेक्टेयर हिस्से पर अतिक्रमण कर पक्का धार्मिक स्थल बना दिया गया। नोटिस के बाद पक्षकार ने अतिक्रमण से इनकार किया था। लेखपाल के सर्वेक्षण में अतिक्रमण की पुष्टि के बाद मामला तहसीलदार न्यायालय पहुंचा। कई तारीखों के बावजूद पक्षकार जियाउल्ला न्यायालय में पैरवी के लिए नहीं पहुंचे।
इसी तरह ग्रामसभा बनाम मोहम्मद अजीज का मामला जुगुनूपुर पंचायत के तत्कालीन मजरा लालापुरवा से जुड़ा है। लालापुरवा बाद में नगर पंचायत में शामिल होकर सरोजनीनगर बन गया। पक्षकार के न्यायालय में उपस्थित न होने से यह मामला भी लंबे समय से लंबित रहा।
शासन की ओर से चकमार्ग, सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण के मामलों में प्रभावी कार्रवाई के निर्देश के बाद राजस्व विभाग ने लंबित मामलों में कार्रवाई तेज की।
निर्धारित समय के भीतर पुनरीक्षण प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए गए हैं। इन्हें स्वीकार कर लिया गया है। संबंधित मामलों में सुनवाई की अगली तारीख निर्धारित कर दी गई है। पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई स्थगित रहेगी।
-आदित्य विशाल, तहसीलदार