निघासन/सिंगाही (लखीमपुर खीरी)। मेरठ हादसे में जान गंवाने वाले तीनों लोगों की कहानी संघर्ष और जिम्मेदारियों से भरी रही। 16 वर्षीय ब्रजमोहन अपने तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़ा था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह कम उम्र में ही रोजी-रोटी के लिए बाहर चला गया था।
वहीं, दस वर्षीय अलीमुद्दीन उर्फ अल्मू अपने परिवार में दूसरे नंबर का बेटा था। उसके परिवार में पांच छोटी बहनें और तीन भाई हैं। वह अपने बड़े भाई खुर्शीद के साथ मेरठ में मजदूरी करने गया था। उसके पिता गांव में रहकर सिंगाही तक ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। 32 वर्षीय अरशद अपने पूरे परिवार के साथ अक्तूबर में मेरठ गया था।
टांडा निवासी अरशद पुत्र जहीर, अलीमुद्दीन पुत्र मुर्शद और बथुआ निवासी ब्रजमोहन पुत्र धरमू मेरठ के असमाबाद क्षेत्र में गन्ना छिलाई का काम करने गए थे। बुधवार रात तीनों बाइक से अपने कमरे पर लौट रहे थे। इसी दौरान मेरठ के किठौर थाना क्षेत्र में बागवाला और नदलीपुर के बीच सामने से आ रही ट्रैक्टर-ट्रॉली से उनकी बाइक की भिड़ंत हो गई।
हादसे में अरशद और ब्रजमोहन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल अलीमुद्दीन को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां बृहस्पतिवार सुबह करीब नौ बजे उसने भी दम तोड़ दिया।
मृतक अरशद अपने पीछे पत्नी मुनीषा और चार बच्चों मिनाजुन निशा (15), महकद अली (10), रब्बीक (6) और रोजाना (3) को छोड़ गए हैं। घटना की सूचना मिलते ही परिजन शव लेने मेरठ के लिए रवाना हो गए।
पूर्व प्रधान कृपाशंकर ने मृतकों के घर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने बताया कि सभी लोग अक्तूबर में गन्ना छीलने मेरठ गए थे और अरशद अपने परिवार के साथ वहीं किराये के मकान में रह रहा था।
मृतक अरशद का फाइल फोटो
मृतक अरशद का फाइल फोटो