लखीमपुर खीरी। वर्ष 1947 में विभाजन के समय पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को उनकी जमीन का मालिकाना हक देने को लेकर सर्वे का कार्य पूरा होने के बाद रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। यह रिपोर्ट दो से तीन दिन में शासन को भेज दी जाएगी। इसके बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के जिन 10 हजार परिवारों को उत्तर प्रदेश के चार जिलों में बसाया गया था, उसमें करीब डेढ़ हजार से ज्यादा लखीमपुर में हैं। इसके अलावा पीलीभीत, रामपुर और बिजनौर में भी शरणार्थियों को बसाया गया था। इन शरणार्थियों को उनकी जमीन पर संक्रमणीय भूमिधर अधिकार देने के लिए शासन की ओर से कवायद शुरू की गई है। इसमें मुरादाबाद के कमिश्नर अंजनेय कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित कमेटी की ओर से चारों जिलों में सर्वे का काम करीब-करीब पूरा कर लिया गया है। इसके बाद अब रिपोर्ट शासन को भेजी जानी है।
कमिश्नर अंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि लखीमपुर और पीलीभीत में ऐसे शरणार्थियों की संख्या कम है, जो तालाब और चारागाह जैसी सार्वजनिक श्रेणी की भूमि पर खेती कर रहे हैं, हालांकि जंगल की जमीन पर कुछ लोग काबिज हैं, जिसके लिए अलग से रिपोर्ट तैयार की जा रही है। पूर्व में इस मसले को लेकर प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, जिसमें चारों जिलों में जमीन की श्रेणी के हिसाब से अलग-अलग रिपोर्ट बनाकर प्रस्तुत की गई थी। कमिश्नर ने बताया कि शरणार्थियों को उनकी जमीन पर मालिकाना हक देने के लिए दो से तीन दिन में रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।