रामलीला मेले में नगर पालिका के सौजन्य से चल रही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला में दूसरे दिन रामायण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें अयोध्या से आए बालयोगी 1008 कृष्णानंद महाराज ने कहा कि भगवान राम एक आदर्श पुत्र, आदर्श शिष्य, आदर्श पति और आदर्श राजा थे इसीलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहा गया। उनका संपूर्ण जीवन ही एक आदर्श आचार संहिता है।
उन्होंने कहा कि संसार एक नाट्यशाला है। स्ववश केवल भगवान है जीव परवश है। जिनका जीवन कथा से जुड़ा है उनकी व्यथा मिट गई। समाज के लिए किया गया कार्य ही समाज में सम्मानित होता है। राक्षसों के विनाश के लिए विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को मांग कर ले गए अर्थात राष्ट्र कार्य करने के कारण ही वह महर्षि कहलाए। उन्होंने कहा कि सिद्धांतवादी व्यक्ति ही पूजित होता है सुविधावादी नहीं। यहां मेलाध्यक्ष संदीप सिंह ने रामायण संगोष्ठी में आए मानस मर्मज्ञों का स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान किया। कार्यक्रम में डॉ. अजय पांडेय, डॉ. ओंकार नारायण, दुबे, राज किशोर पांडेय प्रहरी, आचार्य संजय मिश्र, बृजेश पांडेय, राज कुमार त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।