लखीमपुर खीरी। जिला महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट बिना बताए अवकाश पर चली गई हैं। ऐसे में अल्ट्रासाउंड जांच की भी छुट्टी हो गई है। साल के अंतिम दिन बुधवार को कई गर्भवतियों को बैरंग ही लौटना पड़ा।
मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला महिला अस्पताल में 50 बेड की क्षमता है। 12 बेड का स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड बनाया गया है। राष्ट्रीय मिशन स्वास्थ्य के तहत 20 जून, 2016 को जिला महिला अस्पताल में प्राइवेट वार्ड बनवाए गए थे। इन वार्ड को बने नौ साल बीते चुके हैं लेकिन अब तक इनको चालू नहीं कराया जा सका है।
प्राइवेट वार्ड न होने से प्रसूताओं को यहां जनरल वार्ड में ही भर्ती किया जाता है। प्राइवेट वार्ड लेने की चाह रखने वाले तीमारदारों व कई बार जनरल वार्ड भर जाने के बाद मरीजों व तीमारदारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जिला महिला अस्पताल में बुधवार को अल्ट्रासाउंड कक्ष के गेट पर ताला लटकता रहा। दीवार पर दो दिनों के लिए जांच बंद होने का नोटिस चस्पा था। करीब 15 किलोमीटर दूर लकपेड़ागंज गांव से आईं आरती ने बताया कि चिकित्सकों ने उन्हें अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लिखा था लेकिन जांच दो दिनों के लिए बंद है। अब उन्हें दो दिन बाद आना पड़ेगा। शहर के गौटेय्याबाग निवासी रेशमा ने बताया कि जांच नहीं हो सकी है। ऐसे में उन्हें बाहर से जांच कराने के लिए आना पड़ेगा।
जिला महिला अस्पताल में काफी समय से किसी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं थी। जिला अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट डॉ. डीके पुष्कर को यहां की भी जिम्मेदारी दी गई थी। बीते करीब तीन माह पहले ही जिला महिला अस्पताल में नए रेडियोलॉजिस्ट को तैनात किया गया था। हालांकि, वह भी कुछ माह काम करने के बाद बीते सप्ताह बिना सूचना दिए छुट्टी पर चली गईं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 70-80 महिलाएं अल्ट्रासाउंड के लिए आती है। ऐसे में उनके सामने समस्या उत्पन्न हो गई है।
इंसानों के अस्पताल में कुत्तों का कब्जा
सुप्रीम कोर्ट ने बेसहारा कुत्तों पर लगाम लगाने के लिए आदेश भले ही दिए हों लेकिन जिला महिला अस्पताल के गेट के भीतर यह लागू नहीं हो पा रहे हैं। बुधवार को अस्पताल परिसर के अंदर वार्ड से लेकर अस्थायी रैन बसेरा व अल्ट्रासाउंड कक्ष के समीप तक आवारा कुत्तों का जमावड़ा लगा रहा। यहां बैठे गार्ड भी इन कुत्तों को घुसने से रोक नहीं पाए। इन कुत्तों के आतंक और रैन बसेरा में सुविधाएं न होने से तीमारदारों को खुले में रहना पड़ रहा है।
रेडियोलॉजिस्ट बिना सूचना दिए चली गई हैं। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। प्राइवेट वार्ड में सीवर सहित कई कमियां हैं। इसलिए यह इमारत हैंडओवर नहीं ली गई। जिला महिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज की नई इमारत में जल्द ही शिफ्ट होने वाला है। वहां मरीजों काे सहूलियत मिलेगी।
डॉ. अमित गुप्ता, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
भीषण ठंड में खुले में बैठे तीमारदार। संवाद
भीषण ठंड में खुले में बैठे तीमारदार। संवाद
भीषण ठंड में खुले में बैठे तीमारदार। संवाद