पीलीभीत। मुठभेड़ में तीन खालिस्तानी आतंकियों की माैत और उनके चंद स्थानीय मददगारों की कारस्तानी से पूरनपुर फिर एक बार सुर्खियों में है। खालिस्तान समर्थक आतंकवाद की यादें ताजा हो रही हैं। न केवल क्षेत्र की सुरक्षा सवालों में है, बल्कि यहां के लोगों की साख भी दांव पर है। खासताैर पर पूरनपुर ही नहीं पीलीभीत जिले की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका रखने वाले सिख समाज के लोगों में इसको लेकर गुस्सा है। उनका कहना है कि ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। यही नहीं वे पुलिस-प्रशासन की मदद भी कर रहे हैं।
पूरनपुर तहसील क्षेत्र की कुल आबादी छह लाख से अधिक है। इस आबादी में सिख समाज का करीब 20 हिस्सा है। तहसील क्षेत्र में पूरनपुर नगर, गजरौला, माधोटांडा, शाहगढ़, हजारा, मथना जप्ती, बाराही, मंझारा आदि सिख बहुल इलाके हैं। सिख समाज की बड़ी आबादी खेती-किसानी से जुड़ी है। इसके अलावा उद्योग-धंधों में भी अच्छी-खासी हिस्सेदारी है। विदेशों में भी यहां के कई लोग हैं। जिले की राजनीति में भी सिख समाज की दखल है। तराई का यह इलाका मिनी पंजाब कहलाता है।
ऐसे में माहाैल बिगड़ने पर लोग नाराज हाेते हैं। आतंकवाद के सफाए के बाद जब-जब कोई हरकत होती है तो पूरनपुर के लोगों का बड़ा तबका उसकी खिलाफत में रहता है। लोग खुलकर बोलने से बचते हैं और उनका मानना है कि ऐसे में सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि 80 और 90 के दशक में आतंकवाद के सफाए के बाद हाल के वर्षों में गलत गतिविधियां फिर सामने आ रही हैं।
जून में जरनैल सिंह भिंडरावाला के समर्थन में कुछ लोगों ने गुरुद्वारे के बाहर होर्डिंग लगवा दिया था। इसको लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इससे पहले मार्च में जम्मू में गैंगस्टर राजेश डोगरा की हत्या में शामिल बदमाश भी यहीं शाहगढ़ से पकड़े गए थे। पंजाब में अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी संदीप की हत्या मार्च 2022 में हुई थी। इस मामले में जेल में बंद आरोपी यादवेंद्र सिंह उर्फ आजाद के घुंघचाई के अभयपुर माधवपुर स्थित घर पर एनआईए ने फरवरी 2023 में छापा मारा था। तलाशी में पाकिस्तानी हथियार भी मिले थे। वर्ष 2023 में ही खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल के यहां आने का मामला भी उठा था।
शोरूम, शैक्षिक संस्थान से लेकर बड़े उद्याेगों तक में हिस्सेदारी
पूरनपुर क्षेत्र में सिख समाज की अधिकांश क्षेत्र में हिस्सेदारी है। सिख समाज के लोग शैक्षिक संस्थानों को भी संचालित कर रहे हैं। वाहन शोरूम, छोटे-बड़े होटल, अस्पताल और अन्य व्यवसायों से जुड़े हैं। खेती-किसानी प्रमुख पेशा है। चावल और गन्ने के बड़े उत्पादक हैं। 100 से 150 एकड़ तक के काश्तकार हैं। कई अन्य फसलों के उत्पादन में भी इनका नाम है।
विकास के मामले में पीलीभीत से आगे है पूरनपुर
90 के दशक में जब पूरनपुर क्षेत्र में आतंकवाद चरम पर था, उस समय बड़े व्यापारियों में भगदड़ थी। कई व्यापारी घर-मकान छोड़कर दूसरे शहराें में चले गए। कई लोगोंं ने अपनों को खोया था। नगालैंड और अन्य स्थानों से आए सुरक्षा बलों ने पूरनपुर को आतंक से निजात दिलाई। इसके बाद इस क्षेत्र ने मुड़कर नहीं देखा। स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, बड़े होटल और अन्य सुविधाओं में तेजी से विकास हुआ। आज के समय में विकास के मामले में पूरनपुर को पीलीभीत से बेहतर माना जाता है। जिला मुख्यालय पूरनपुर से काफी पीछे है।
कनाड़ा, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया और अमेरिका तक में बसे हैं लोग
बताया जा रहा है कि पूरनपुर क्षेत्र के कई लोग कनाडा, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया, अमेरिका और अन्य देशों में हैं। सिख समाज में प्रत्येक घर से कोई न कोई सदस्य विदेश में है। वहां इनका अच्छा-खासा व्यापार है। यह भी इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार हैं। अकेले पूरनपुर में वीजा बनाने के 25 से 30 आउटलेट संचालित हैं।