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जन जीवन में जहर घोल रहा औद्योगिक प्रदूषण

Sat, 25 Feb 2017 10:27 PM IST
विकास शुक्ला लखीमपुर खीरी।
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प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
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नदी में पहुंच रहा कचरा, गांवों के हैंडपंप से निकल रहा पीला जल
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प्रदूषित जल पीने से बीमार हो रहे लोग
आम लोगों की जिंदगी को अहम मानते हुए सुप्रीम कोर्ट के औद्योगिक इकाइयों को प्रदूषण रोकने के इंतजाम करने के आदेश से जहां साफ पानी और हवा की उम्मीद बंधी है, वहीं जिले में हड़कंप की स्थिति है। वजह है, जिले की फैक्ट्रियों में प्राथमिक औद्योगिक प्रवाह शोधन संयत्र (ईटीपी) अव्वल तो लगे ही नहीं हैं और जहां लगे भी है तो चल नहीं रहे हैं। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश बाद क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सख्त कार्रवाई की बात कह रहा है, लेकिन जब तक ईटीपी लगाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान नहीं चलाया जाएगा, तब तक जिला औद्योगिक प्रदूषण से उबर नहीं पाएगा।
जिले में नौ चीनी मिलों के अलावा खांडसारी, प्लाईवुड, दफ्ती और राइस मिलों समेत अनेक उद्योग लगे हैं। इनमें से कई इकाइयों से दूषित जल की निकासी सीधे नदी और अन्य जलाशयों में हो रही है। स्थिति यह है कि अधिकांश इकाइयों में ईटीपी ही नहीं है। यह भी सामने आया है कि जिन इकाइयों में ईटीपी लगा है, वह निरीक्षण के दौरान अधिकांश मामलों में बंद पाया जाता है। इसके चलते जल प्रदूषण से गंभीर बीमारियों फैल रही हैं। प्रदूषण इस कदर फैल चुका है कि कुछ फैक्ट्रियों से सटे गांवों में जल स्रोतों के जरिए भूगर्भ जल प्रदूषित हो चुका है तो कुछ के प्रदूषण से शारदा, गोमती, सरायन, जौरहा नदी समेत कई नाले और तालाब प्रदूषित हो चुके हैं। नतीजतन कुछ कारखानों से सटे गांवों के हैंडपंप से पीला पानी निकल रहा है, जिसे पीकर लोग बीमार होने लगे हैं। कुल मिलाकर इन उद्योगों के गंदे रसायनयुक्त पानी से नदी और तालाबों के अलावा गांवों का जल भी प्रदूषित हो चुका है, जिससे लोग बीमार हो रहे हैं और उनकी जान को भी खतरा है।
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यह हैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश
देश में बढ़ते जल प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसकी रोकथाम के लिए सख्त आदेश जारी किए हैं। तीन माह में प्रदूषण पर रोक लगाने के साथ ही कहा है कि सभी इकाइयों में अनिवार्य रूप से ईटीपी लगने चाहिए। साथ ही जहां लगे हैं, वहां चालू हालत में हों। ऐसा न होने पर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए है।
 
इन गांवों का पानी है प्रदूषित
गोला गोकर्णनाथ के मोहल्ला मथुरानगर और नगर से सटे गांव भवानीगंज, लांबानगर, दतेली, संपूर्णानगर, पलिया, बेलरायां, मोहम्मदी, निघासन तहसील में लगी चीनी मिलों के आसपास गांवों में प्रदूषित जल की समस्या है। इन गांवों के हैंडपंप से पीला पानी निकलता है। भवानीगंज निवासी शिवकुमार उर्फ गुड्डू हैंडपंप से पानी निकालकर ले आए, जिसमें कुछ देर बाद ही पीले रंग की चिकनाई जैसी परत जम गई। इसी गांव के निवासी लेखराम, रामनिवास, अमीरचंद, सुरेश मिश्र, बंटू यादव, दिनेश कुमार और प्रेम ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि गंदा पानी पीकर गांव के लोग अक्सर बीमार रहते हैं।
 
जिले की यह नदियां होती हैं प्रदूषित
औद्योगिक इकाइयों के जल प्रवाह से शारदा, गोमती, सरायन, सरयू और जौरहा नदी का पानी प्रदूषित होता है। इससे जहां जलस्रोतों से भूगर्भ जल प्रभावित हो रहा है, वहीं पानी में रहने वाली जीव मर जाते हैं और फसलें भी नष्ट हो रही हैं।
  
सख्ती से नहीं होता पालन
जानकार बताते हैं कि क्षेत्रीय स्तर पर नियम और आदेशों का सख्ती से पालन न कराए जाने के चलते ही ऐसी भयावह स्थिति पैदा होती है। शीर्ष अदालत और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर इतने गंभीर हैं कि प्रदूषण पर लगाम के लिए समय समय पर सख्त निर्देश जारी करते हैं, लेकिन विभाग न तो इनकी मॉनीटरिंग करते हैं और न ही कमियां मिलने पर सख्त कदम उठाते हैं। यही वजह है कि औद्योगिक इकाइयों के संचालक बेखौफ होकर प्रदूषित जल बहा देते हैं।
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जिले में कुल उद्योग             162
जिले में चीनी मिलें               09
जिले में क्रेशर                     16
जिले में राइस मिलें              55
प्लाईवुड फैक्ट्री                   32
दफ्ती उद्योग                       01
कोल्हू                             46
 
आदेशों का गंभीरता से हो रहा पालन
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कुलदीप मिश्रा का कहना है कि जहां सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है, वहीं बोर्ड की नजर होती है। सभी उद्योगों में ईटीपी जरूरी है। इसके लिए निरीक्षण किए जाएंगे और जहां जरूरी होगा, वहां नोटिस जारी किए जाएंगे। फिलहाल जिले की चीनी मिलों समेत अधिकतर इकाइयों में ईटीपी लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन गंभीरता से किया जाएगा।
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