लखीमपुर खीरी। हिंदी, दिल से दिल के बीच रिश्ता जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। जब कोई अपने मन की बात हिंदी में कहता है तो उसमें अपनत्व की मिठास शामिल होती है। हिंदी मातृभाषा होने के साथ साथ सांस्कारिक भाषा है। ‘हिंदी हैं हम’ अभियान को लेकर हिंदी के प्रवक्ताओं का कहना है कि अमर उजाला ने जो अभियान शुरू किया है उससे हिन्दी को और बढ़ावा मिलेगा।
हिंदी ही एक ऐसी भाषा है, जिसने पूरे देश को एकता के सूत्र में बांध रखा है। हमारी मातृभाषा में ऐसी मिठास है कि प्रेम भावना का विकास होता है।
-कन्हैया लाल शास्त्री, हिंदी प्रवक्ता पीडी इंटरमीडिएट कॉलेज मोहम्मदी
हिंदी एक विशाल जनसमूह की भाषा है। भारतीयों में विचारों का आदान-प्रदान करने का सबसे बेहतर माध्यम हिंदी भाषा है। हिंदी से दूरी बनाकर कोई व्यक्ति विकास नहीं कर सकता।
-एनके मिश्रा, सेवानिवृत्त हिंदी प्रवक्ता बल्देव वैदिक इंटर कॉलेज पलिया
हिंदी ही भाषा का वह माध्यम है, जिससे लोगों के बीच दिल का रिश्ता जुड़ता है। हिंदी के प्रति लोगों में जागृति पैदा करने के लिए अमर उजाला ने जो अभियान शुरू किया है वह बेहद सराहनीय है।
-डॉ. बीनारानी गुप्ता, हिंदी विभागाध्यक्ष आर्यकन्या डिग्री कॉलेज
हिंदी देश की संस्कारिक भाषा है। न्यायालय से लेकर राजस्व कार्यों में आज भी हिंदी के मूल शब्दों का प्रयोग ज्यादा है।
-उमेश शुक्ला, हिंदी प्रवक्ता नवभारत इंटर कॉलेज
हम अपनी मातृ भाषा को छोड़कर अंग्रेजी की तरफ भाग रहे हैं। जिस कारण हिंदी का अस्तित्व खोता जा रहा है। हिंदी में जो अपनापन है वह अंग्रेजी या किसी अन्य भाषा में नहीं है।
-कु. जीतेश मिश्रा, शिवांगी शिक्षक, धौरहरा