मुख्यमंत्री के फैसले पर शासन ने पांच सदस्यीय कमेटी बनाई
केरल और मध्य प्रदेश की तर्ज पर कराया जाएगा एकीकरण
प्रदेश में कमजोर हो चुकी सहकारिता को सशक्त और प्रभावी बनाने के लिए यूपी सरकार ने तीन प्रमुख सहकारी बैंकों के विलय का मसौदा तैयार किया है। जिला सहकारी बैंक (डीसीबी), उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड (एलडीबी) और यूपी कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के एकीकरण का निर्णय लिया गया है, जिसे अमली-जामा पहनाने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी भी बना दी गई है। जो इस फार्मूले से होने वाले नफा-नुकसान का आकलन करते हुए शासन को रिपोर्ट सौंपेगी।
बता दें जिला सहकारी बैंक की प्रदेश में 50 शाखाएं हैं, जिनमें 13 बैंक ही अपना बोझ उठाने में सक्षम हैं, जबकि 18 बैंकें बंद पड़ी हैं। इसी तरह किसानों को ऋण देने वाली उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड की करीब 323 शाखाएं प्रदेश भर में संचालित हैं। जबकि यूपी कोऑपरेटिव बैंक की 27 शाखाएं हैं। इनमें यूपी कोऑपरेटिव बैंक को नाबार्ड से ऋण मिलता है, जो अन्य सहकारी बैंकों को दो प्रतिशत ब्याज पर ऋण मुहैया कराती है। त्रिस्तरीय व्यवस्था में यूपी कोऑपरेटिव बैंक की भूमिका ब्रोकर की तरह है, जिसे खत्म करने की तैयारी शुरू हो गई है। क्योंकि जिला सहकारी बैंकों से ग्रामीण इलाकों में संचालित सहकारी समितियों (पैक्स) का संचालन होता है, जो किसानों को शार्ट टर्म लोन पर खाद-बीज मुहैया कराती हैं। पिछले कुछ सालों में सहकारी समितियों की वित्तीय क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। जबकि डीसीबी और एलडीबी द्वारा किसानों को लंबी अवधि के लिए ऋण दिया जाता है। बताते चलें कि लखीमपुर की एलडीबी शाखाओं में भ्रष्टाचार के मामले सुर्खियों में रह चुके हैं।
भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहकारिता आंदोलन कोर सशक्त बनाने की बात कही थी, जिसका अब क्रियान्वयन शुरू हो गया है। केरल और मध्य प्रदेश में हो चुके सहकारी बैंकों के विलय की तर्ज पर यूपी की सहकारी बैंकों का एकीकरण करने के लिए आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता हरिराज किशोर ने बैंकों के विलय का खाका तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाकर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
यह अफसर शामिल
कमेटी में अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक (बैंकिंग) सहकारिता, प्रबंध निदेशक सहकारी बैंक, अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक (विधि), प्रबंध निदेशक (एलडीबी) और वित्तीय सलाहकार सहकारिता को शामिल किया है।
सहकारी बैंकों के विलय से सहकारिता आंदोलन सशक्त होगा, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। पूर्वांचल समेत कई जिलों में ठप हो चुकी सहकारी बैंकों को पुर्नजीवित करने में मदद मिलेगी। पैक्स समितियों के कर्मचारियों के वेतनमान की व्यवस्था कराई जा सकेगी। सेवा कैडर स्थापित करने और समितियों का प्रांतीय स्तर पर संगठन बनाने की मांग करेंगे।
मनोज अग्रवाल, अध्यक्ष, सहकारी समन्वय समिति, उप्र